मैनपाट में भाजपा का तीन दिवसीय चिंतन शिविर शुरू

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मैनपाट। छत्तीसगढ़ के खूबसूरत हिल स्टेशन मैनपाट (कमलेश्वरपुर) में सोमवार से भाजपा का तीन दिवसीय चिंतन और प्रशिक्षण शिविर शुरू हो गया है। 54 विधायक और 10 सांसद इस शिविर में भाग ले रहे हैं। शिविर का उद्घाटन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने किया। इसके जरिए सत्ता और संगठन के समन्वय, विचारधारा और जनसंपर्क के रणनीतिक पाठ सिखाए जाएंगे।

 
पूरा मंत्रिमंडल मैनपाट में, यहीं से होंगे फैसले
इस तीन दिवसीय शिविर के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित पूरे मंत्रिमंडल, सांसदों और विधायकों की मौजूदगी मैनपाट में ही रहेगी। यानी राज्य सरकार के महत्वपूर्ण फैसले भी यहीं से लिए जाएंगे। मौसम विभाग द्वारा भारी बारिश का अलर्ट जारी किए जाने के बावजूद, संगठन की कमान संभाल रहे अजय जामवाल, पवन साय जैसे नेता एक दिन पहले ही शिविर स्थल पर पहुंच गए थे और तैयारियों की समीक्षा की।
 
शिविर का एजेंडा : संगठन से संवाद, जनता से जुड़ाव
शिविर में भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के कई दिग्गज नेता सांसदों-विधायकों को प्रशिक्षण देंगे। प्रत्येक सत्र का विषय और वक्ता पहले से तय है। प्रमुख विषय और वक्ता इस प्रकार हैं:
 
    भूमिका व प्रस्तावना – जेपी नड्डा (राष्ट्रीय अध्यक्ष)
 
 
    भाजपा का वैश्विक प्रभाव – धर्मेंद्र प्रधान (केंद्रीय शिक्षा मंत्री)
 
 
    सामाजिक-भौगोलिक विस्तार – वी. सतीश (राष्ट्रीय संगठक)
    विकसित छत्तीसगढ़: अवसर और चुनौती – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
    सोशल मीडिया और मीडिया मैनेजमेंट – विनोद तावड़े (राष्ट्रीय महामंत्री)
    लोक व्यवहार, वक्तृत्व कौशल, समय प्रबंधन – शिवराज सिंह (केंद्रीय कृषि मंत्री)
 
 
    पंच प्राण और भाजपा विचार – शिवप्रकाश (राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री)
 
 
    जिज्ञासा समाधान – बी.एल. संतोष (राष्ट्रीय संगठन महामंत्री)
    राष्ट्रीय चुनौतियों में भाजपा की भूमिका – अमित शाह (गृह मंत्री)
 
सात महीने की देरी से हो रहा शिविर
आमतौर पर भाजपा निर्वाचन के तुरंत बाद प्रशिक्षण शिविर आयोजित करती है, लेकिन इस बार विधानसभा, लोकसभा और निकाय चुनावों की व्यस्तता के कारण इसमें लगभग सात महीने की देरी हुई। अब इसे राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाला शिविर माना जा रहा है।
 
सियासत मैनपाट से होगी संचालित
तीन दिन तक प्रदेश की पूरी राजनीति का केंद्र मैनपाट रहने वाला है। यह शिविर भाजपा के लिए संगठन की धार तेज करने, विधायकों-सांसदों के बीच संवाद बढ़ाने, और सरकार-संगठन की साझा प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने का बड़ा मंच है।
 
चिंतन और रणनीति से भरा यह शिविर आने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों के साथ 2029 की तैयारी का बिगुल भी माना जा रहा है।

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