भीषण गर्मी में पशुओं की देखभाल को लेकर पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारी…

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महासमुंद। जिले में पड़ रही भीषण गर्मी को देखते हुए उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं महासमुंद द्वारा पशुपालक कृषकों के लिए समसामयिक सलाह जारी की गई है। वर्तमान में तापमान 42-43 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है और तेज गर्म हवाएं (लू) चल रही हैं, जिससे पशुओं के बीमार होने की संभावना बढ़ गई है।
 
उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. अंजना नायडू ने बताया कि विशेषज्ञों के अनुसार इस मौसम में पशुओं को लू लगने का खतरा अधिक रहता है। इसके प्रमुख लक्षणों में आहार लेने में अरुचि, तेज बुखार, सांस का तेज चलना (हांफना), नाक से स्राव, आंखों से पानी आना, आंखों का लाल होना, पतला दस्त तथा शरीर में पानी की कमी के कारण लड़खड़ाकर गिरना शामिल हैं। पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे पशुओं को सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक छायादार एवं ठंडे स्थान (कोठे) में रखें। कोठे को खुला न छोड़कर टाट या बोरे से ढककर रखें तथा उस पर समय-समय पर पानी का छिड़काव कर वातावरण को ठंडा बनाए रखें, ताकि गर्म हवाओं के प्रभाव से बचाव हो सके।
 
पशुओं को पर्याप्त मात्रा में संतुलित एवं पौष्टिक आहार देने के साथ-साथ हमेशा स्वच्छ एवं ठंडा पेयजल उपलब्ध कराना आवश्यक है। गर्मी के दौरान ठोस आहार की बजाय तरल एवं नरम आहार देना अधिक लाभकारी होता है। साथ ही विवाह या अन्य आयोजनों से बचे बासी भोजन को पशुओं को खिलाने से बचने की सलाह दी गई है। कोठे की नियमित साफ-सफाई बनाए रखना भी जरूरी है। नवजात बछड़ों एवं बछियों की विशेष देखभाल करने की आवश्यकता बताई गई है। संकर नस्ल एवं भैंस प्रजाति के पशुओं को पानी की उपलब्धता के अनुसार दिन में कम से कम एक बार नहलाने की सलाह दी गई है। यदि कोई पशु असामान्य व्यवहार करता दिखाई दे, तो तत्काल निकटतम पशु चिकित्सा संस्थान से संपर्क कर उपचार कराना चाहिए। इसके अलावा ग्रीष्म ऋतु में पशुओं से संचालित वाहनों (जैसे बैलगाड़ी आदि) के उपयोग पर भी दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक 01 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक प्रतिबंध रखने हेतु जनजागरूकता बढ़ाने की अपील की गई है, ताकि पशुओं को अत्यधिक गर्मी से बचाया जा सके।

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