बीरगांव। नगर निगम के वार्ड क्रमांक 28 के पार्षद एवं एमआईसी सदस्य इकराम अहमद ने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्ष 2014 से पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में बैठी भाजपा सरकार ने अपने अधिकांश महत्वपूर्ण विधेयकों को आसानी से पारित कराया है, लेकिन जब बात महिलाओं को उनका अधिकार देने की आई, तो सरकार की मंशा पर गंभीर संदेह उत्पन्न हो गया है।
उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी महिलाओं की है और उन्हें 33 प्रतिशत राजनीतिक आरक्षण देना उनका संवैधानिक एवं नैतिक अधिकार है। इसके बावजूद इस महत्वपूर्ण विधेयक का पारित न हो पाना यह दर्शाता है कि सरकार महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर पूरी तरह गंभीर नहीं है।
इकराम अहमद ने स्थानीय संदर्भ देते हुए कहा कि आज निगम क्षेत्र में महिलाएं हर क्षेत्र में उल्लेखनीय भूमिका निभा रही हैं—चाहे वह छोटे व्यवसाय हों, स्व-सहायता समूह हों या परिवार की जिम्मेदारियां। वार्ड क्षेत्र में रामदास की दुकान जैसे छोटे व्यापारों में भी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी देखी जा सकती है, लेकिन उन्हें राजनीतिक स्तर पर समान अवसर नहीं मिल पाना चिंताजनक है।
उन्होंने आगे कहा कि यदि केंद्र सरकार वास्तव में इच्छाशक्ति दिखाती, तो यह विधेयक भी अन्य बिलों की तरह आसानी से पारित किया जा सकता था। लेकिन ऐसा न होना इस बात का संकेत है कि महिलाओं के मुद्दों का उपयोग केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।
आज देश की महिलाएं भाजपा नेतृत्व से जवाब मांग रही हैं—आखिर उन्हें उनका अधिकार कब मिलेगा
महिला सशक्तिकरण केवल नारों से नहीं, बल्कि ठोस निर्णयों से सिद्ध होना चाहिए।








Leave a Reply