80 आईपीओ लिस्टिंग के साथ दुनिया में शीर्ष पर है भारत

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भारतीय शेयर बाजार इस समय तेजी के रंग में नजर आ रहा है. मार्च से शुरू हुई तेजी अभी भी थम नहीं रही है, स्थानीय प्राथमिक बाजार भी वैश्विक बाजार को मात दे रहा है। आईपीओ बाजार में भी तेजी देखी जा रही है और खासकर एसएमई सेगमेंट की कंपनियां फंड जुटाने में जल्दबाजी दिखा रही हैं।

आईपीओ लॉन्च करने के मामले में देश के स्टॉक एक्सचेंजों ने दुनिया के बाकी स्टॉक एक्सचेंजों को पीछे छोड़ दिया है। आईपीओ लॉन्च के मामले में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज दुनिया के शीर्ष एक्सचेंज बन गए हैं। वैश्विक आर्थिक मंदी को नजरअंदाज करते हुए, भारतीय एक्सचेंजों ने इस साल अब तक 80 लिस्टिंग की है, जो पिछले साल की तुलना में 33त्न अधिक है। पिछले साल इन एक्सचेंजों ने कुल 60 आईपीओ पेश किए थे। अन्स्र्ट एंड यंग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ‘लिस्टिंग में बढ़ोतरी का मुख्य कारण एसएमई सेक्टर के आईपीओ हैं, जो उद्यमशीलता गतिविधि में वृद्धि का संकेत देते हैं।’ रिसर्च हाउस का कहना है कि इस साल कुल 2.1 अरब डॉलर जुटाए गए हैं, जो साल-दर-साल 62 प्रतिशत कम है। दूसरी तिमाही में पहली तिमाही की तुलना में अधिक सौदे हुए। अधिकांश आईपीओ उद्योग, स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से संबंधित हैं। अप्रैल में, इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट से जुड़ी एक इकाई ने 638 मिलियन डॉलर जुटाए। भारत में नए आईपीओ का चलन जोरों पर है और वैश्विक आईपीओ बाजार में भारत की हिस्सेदारी भी लगातार बढ़ रही है। वैश्विक आईपीओ बाजार में भारत की हिस्सेदारी 2021 के दौरान 6 फीसदी थी, जो 2022 में बढक़र 22 फीसदी हो गई. अब तक के आंकड़ों के मुताबिक इस साल यानी 2023 में यह हिस्सेदारी बढक़र 13 फीसदी हो गई है। पहली तिमाही की तुलना में दूसरी तिमाही में वैश्विक आईपीओ गतिविधि में तेजी आई और जून तिमाही में प्रदर्शन काफी हद तक पिछले साल की समान अवधि के अनुरूप था। दूसरी तिमाही में कुल $39 बिलियन के 310 सार्वजनिक निर्गम आए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5 प्रतिशत कम है।

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