पुष्पा भी मिला और माल भी, नदी के रास्ते कर रहे थे लकड़ी तस्करी

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ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पुष्पा फ़िल्म की तर्ज पर नदी के ज़रिए लकड़ी तस्करी हो रही है। जी हां पुष्पा फ़िल्म में चंदन की लकड़ी तस्करी हो रही थी तो ग्वालियर में खैर की लकड़ी की तस्करी का खेल चल रहा था। वन विभाग की विजिलेंस टीम की घाटीगांव के जंगल मे हुई छापामारी के दौरान इसका खुलासा हुआ। टीम ने राजस्थान के तीन तस्करों को दबोचा और 2 ट्रकों से लाखों रुपए कीमत की खैर की लकड़ी बरामद की है। टीम ने जब जंगल मे सर्चिंग की तो नदी में करीब 35 क्विंटल लकड़ी मिली।  की वन विभाग तस्करों के नेटवर्क के बारे में पूछताछ कर रही है। ग्वालियर की घाटीगांव के जंगलों में खैर की लकड़ी तस्करी होने की जानकारियां वन विभाग के अधिकारियों को मिली थी। कत्था बनाने में काम आने वाली खैर की लकड़ी की कई राज्यों में डिमांड है, इसी आधार पर वन विभाग ने विजिलेंस टीम बनाकर जंगलों में सर्चिंग अभियान शुरू कराया। शुक्रवार रात जब जखौदी इलाके में टीम ने राजस्थान के दो ट्रक यहां से पकड़े, इन दोनों ट्रक में खैर की लकड़ी भरी थी।  
ट्रक में राजस्थान के अलवर निवासी हामिद खान, अजहरुद्दीन और साउदी खान मौजूद थे। वन विभाग की टीम ने तीनों को गिरफ्तार कर इनके खिलाफ फॉरेस्ट एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया। जब वन विभाग की टीम ने उनके नेटवर्क और मोडस ऑपरेंडी को खंगाली तो अधिकारी हैरान रह गए। क्योंकि लकड़ी तस्करी का यह पूरा खेल पुष्पा फिल्म की तर्ज पर चल रहा था। जिस तरह पुष्पा फ़िल्म में नदी के जरिए लाल चंदन की तस्करी होती है, उसी तर्ज पर ग्वालियर के जंगलों में खैर की लकड़ी की तस्करी हो रही थी। जखौदी के जंगल मे पुष्पा स्टाइल में सांक नदी में खैर की लकड़ी जमा की जा रही थी। वन विभाग ने नदी से 35 क्विंटल लकड़ी बरामद की है। कुल पांच लाख रुपए कीमत की लकड़ी वन विभाग ने रिकवर की है। वन अधिकारियों का कहना है की लकड़ी तस्करी का यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला है। लकड़ी तस्करी के खेल में तस्करों के अलावा स्थानीय लोग और कुछ कर्मचारी भी शामिल होने की जानकारियां मिल रही है। पकड़े गए आरोपियों से उनके नेटवर्क के बारे में पूछताछ की जा रही हैं, वही तस्करों के मददगारों की जांच भी चल रही है, लकड़ी तस्करी के इस खेल में जो भी शामिल होंगे उन सबके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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