लोक जगत, कवर्धा। हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी जोराताल में निवासरत परिवारों के बीच प्रतिमाह ₹500 शुल्क लिए जाने के आदेश को लेकर व्यापक रोष व्याप्त है। रहवासियों का कहना है कि कॉलोनी में पर्याप्त मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के बावजूद ₹300 जलकर तथा ₹200 साफ-सफाई/भू-संधारण शुल्क के रूप में प्रतिमाह राशि वसूल किए जाने का आदेश समझ से परे है।
कॉलोनीवासियों के अनुसार, साफ-सफाई के नाम पर ₹200 प्रतिमाह लिए जाने के बावजूद वर्षों से कॉलोनी की सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। नालियां बजबजा रही हैं तथा अनेक स्थानों पर झाड़-फूस, गाजर घास एवं खरपतवार का जमावड़ा है। नियमित सफाई नहीं होने के कारण गंदगी और अव्यवस्था की स्थिति बनी हुई है।

स्ट्रीट लाइट भगवान भरोसे, सड़क और सुरक्षा व्यवस्था भी बदहाल
रहवासियों का कहना है कि कॉलोनी की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था भी भगवान भरोसे है। कई स्थानों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने के कारण रात में आवागमन में परेशानी होती है। वहीं सड़कें भी खराब स्थिति में हैं। कॉलोनी में सुरक्षा की दृष्टि से भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण रहवासियों में चिंता बनी हुई है।
गार्डन, दुकान और स्कूल का वादा वर्षों बाद भी अधूरा
कॉलोनीवासियों का कहना है कि हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों द्वारा कॉलोनी में गार्डन, दुकान एवं स्कूल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के वायदे किए गए थे, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी इन सुविधाओं का सपना पूरा नहीं हो सका है। रहवासियों का कहना है कि एक ओर सुविधाओं का अभाव है, वहीं दूसरी ओर लगातार नए शुल्क लगाए जा रहे हैं।
LIG मकानों पर ₹500 मासिक शुल्क, रहवासियों ने उठाया सवाल
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी जोराताल में LIG (निम्न आय वर्ग) श्रेणी के मकान निम्न एवं मध्यमवर्गीय परिवारों को ध्यान में रखकर बनाए और आवंटित किए गए हैं। रहवासियों का कहना है कि वर्तमान में लगाए जा रहे विभिन्न शुल्कों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि यह शुल्क व्यवस्था निम्न एवं मध्यमवर्गीय परिवारों की आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखकर निर्धारित नहीं की गई है।
रहवासियों ने सवाल उठाया कि जब ये मकान निम्न आय वर्ग एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बनाए गए हैं, तो लगातार बढ़ते शुल्कों का आर्थिक बोझ इन परिवारों पर क्यों डाला जा रहा है?
2014 से सितंबर 2025 तक नहीं था भू-संधारण शुल्क, अब किस आधार पर?
कॉलोनीवासियों का कहना है कि वर्ष 2014 से सितंबर 2025 तक भू-संधारण शुल्क नहीं लिया जाता था। ऐसे में अब अचानक ₹200 प्रतिमाह भू-संधारण/साफ-सफाई शुल्क लगाए जाने के आधार, नियम एवं औचित्य को लेकर रहवासियों के मन में सवाल हैं। उनका कहना है कि इस शुल्क के संबंध में हाउसिंग बोर्ड प्रबंधन द्वारा स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
जलकर में भी अंतर, ₹180 की जगह ₹300 वसूली पर सवाल
रहवासियों ने जलकर की राशि को लेकर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि नगर पालिका परिषद कवर्धा में जलकर की राशि ₹180 होने की जानकारी है, जबकि हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी जोराताल में ₹300 जलकर लिया जा रहा है। रहवासियों ने इस अंतर को लेकर भी हाउसिंग बोर्ड प्रबंधन से स्पष्ट जवाब और शुल्क निर्धारण का आधार बताने की मांग की है।
30 वर्षों की राशि एकमुश्त जमा करने के बाद भू-संधारण शुल्क क्यों?
कॉलोनीवासियों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि भवन आवंटन एवं प्री-होल्ड के समय 30 वर्षों के लिए निर्धारित राशि एकमुश्त जमा कराई जा चुकी है, तो इसके बाद भू-संधारण के नाम पर अतिरिक्त ₹200 प्रतिमाह किस आधार पर लिया जा रहा है? रहवासियों का कहना है कि इस संबंध में हाउसिंग बोर्ड द्वारा स्पष्ट नियम, आदेश एवं शुल्क निर्धारण का आधार बताया जाना चाहिए।
पहले सुविधा, फिर शुल्क वसूली की मांग
कॉलोनीवासियों ने हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों से मांग की है कि ₹500 प्रतिमाह शुल्क वसूली के आदेश पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए। साथ ही कॉलोनी में नियमित साफ-सफाई, नालियों की सफाई, पर्याप्त स्ट्रीट लाइट, सड़कों की मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था तथा अन्य मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। इसके अलावा वर्षों से लंबित गार्डन, दुकान एवं स्कूल की सुविधा संबंधी वायदों को भी जल्द पूरा करने की मांग की गई है।
रहवासियों का कहना है कि जब कॉलोनी में मूलभूत सुविधाएं ही पर्याप्त नहीं हैं, तो उनके नाम पर शुल्क वसूली किस आधार पर की जा रही है? हाउसिंग बोर्ड प्रबंधन को इस संबंध में रहवासियों के समक्ष स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
कॉलोनीवासियों ने शासन एवं हाउसिंग बोर्ड के उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की समीक्षा कर अनुचित एवं अतिरिक्त शुल्क के संबंध में राहत प्रदान करने तथा कॉलोनी की मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग की है।







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