पूर्व राष्ट्रपति प्रणव दा नहीं रहे

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 नई दिल्ली : सोमवार को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन हो गया। 84 वर्षीय प्रणब मुखर्जी को मस्तिष्क में खून का थक्का जमने के कारण 10 अगस्त से अस्पताल में भर्ती किया गया था। प्रणब मुखर्जी कोरोना संक्रमित थे और बीते कुछ दिनों से उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। प्रणब मुखर्जी बीते पांच दशक से देश के सियासत में सक्रिय थे और करीब 42 साल तक केंद्र में मंत्री रहे। प्रणब मुखर्जी 169 में पहली बार राज्यसभा सांसद चुने गए थे। 

प्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर 1935 को हुआ। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में जन्म से लेकर प्रणब मुखर्जी ने देश के प्रथम नागरिक यानी राष्ट्रपति पद तक का सफर तय किया। आमतौर पर ‘प्रणब दा’ के नाम से मशहूर प्रणब मुखर्जी को देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। प्रणब दा देश के वित्त मंत्री, विदेश मंत्री और राष्ट्रपति पद पर रह चुके हैं। इसके अलावा करीब 42 साल तक अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं।
प्रणब मुखर्जी के पिता किंकर मुखर्जी ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन में संघर्ष किया था। प्रणब दा ने सूरी विद्यासागर कॉलेज से पढ़ाई के बाद पॉलिटिकल साइंस और इतिहास में एमए किया। साथ में एलएलबी की भी डिग्री हासिल की। बाद में उन्होंने राजनीति को अपने जीवन का लक्ष्य बना दिया। पहले ही दौर में इंदिरा गांधी पर अपनी छाप छोड़ी। बैंकों के राष्ट्रीयकरण में भूमिका निभाई। प्रणब मुखर्जी 1969 में इंदिरा गांधी की मदद से कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य चुने गए। 1973 में कांग्रेस सरकार के मंत्री भी बन गए थे।

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