शिव-सती प्रसंग सुनकर भाव विभोर हुए श्रोता

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बलौदा। हरदी महामाया में जारी नौ दिवसीय शिव महापुराण कथा के चौथे दिवस पर शनिवार को व्यासपीठ पर विराजमान कथावाचक पंडित उपेन्द्र कुमार पाण्डेय ने कामदेव चरित्र, सति चरित्र व उत्सव का कथा प्रसंग सुनाया। उन्होंने कामदेव चरित्र पर उपस्थित श्रद्धालुओं को बताया कि कामदेव प्रेम व कामेच्छा के देवता है। वह मनुष्य को अपने कामवेग से अपनी ओर खींचते है, लेकिन भगवान का सच्चा भक्त काम को भी अपने दृढ़ विश्वास और आस्था से पराजय कर सकता है। शिव सती प्रसंग पर भाव विभोर कथा कहते हुए पाण्डेय ने कहा कि भगवान शिव की अनुमति लिए बिना उमा अपने पिता दक्ष के यहां आयोजित यज्ञ में पहुंच गई। यज्ञ में भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिए जाने से कुपित होकर सती ने यज्ञ कुंड में आहुति देकर शरीर त्याग दी। इससे नाराज शिव के गणों ने राजा दक्ष का यज्ञ विध्वंस कर दिया। इसलिए जहां सम्मान नहीं मिले, वहां कदापि नहीं जाना चाहिए। किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जहां आप जा रहे हैं, वहां आपका, अपने इष्ट या अपने गुरु का अपमान न हो, यदि ऐसा होने की आशंका हो तो उस स्थान पर जाना नहीं चाहिए। चाहे वह स्थान अपने जन्मदाता पिता का ही घर क्यों न हो। पाण्डेय ने कहा कि भगवान भोलेनाथ संसार के सभी पशुओं के नाथ थे। इसलिए उन्हें पशुपतिनाथ भी कहा जाता है। उनकी शादी में तरह-तरह के पशु सम्मिलित हुए थे। भगवान भोलेनाथ की विवाह में सम्मिलित होने का सुख हमारा पुण्य कर्म को दर्शाता है,  ज्ञात हो कि महिला समूह द्वारा आयोजित यह शिव महापुराण कथा प्रतिदिन दोपहर २ बजे से ८ बजे तक चल रहा है। वहीं, रोज सुबह 8 से ११.30 बजे तक महारुद्राभिषेक का आयोजन भी हो रहा है। कथा को सुनने बड़ी संख्या में नगर सहित मोहल्ले से शिवभक्त जुट रहे हैं। 

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