रिसदी तालाब में डूबने से तीन बच्चों की मौत, पुलिस विभाग में शोक की लहर

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कोरबा। जिले में रविवार को हुए एक दर्दनाक हादसे ने पूरे पुलिस विभाग और स्थानीय समुदाय को गहरे शोक में डूबा दिया। रिसदी तालाब में घूमने गए तीन मासूम बच्चों की डूबने से मौत हो गई। घटना इतनी अचानक हुई कि परिवारजन और आसपास मौजूद लोग संभल भी नहीं पाए। मृत बच्चों की पहचान युवराज सिंह ठाकुर (9), आकाश लकड़ा (13) और प्रिंस जगत (12) के रूप में हुई है। तीनों बच्चे पुलिसकर्मियों के बेटे थे और आपस में घनिष्ठ मित्र थे।  
ऐसे हुआ हादसा जानकारी के मुताबिक, तीनों बच्चे शुक्रवार को सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित रिसदी तालाब में घूमने गए थे। इस दौरान खेल-खेल में वे तालाब के गहरे हिस्से में चले गए। पानी की गहराई का अंदाजा न होने के कारण तीनों बच्चे डूबने लगे और देखते ही देखते उनकी जान चली गई। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। मृत बच्चों का पारिवारिक संबंध युवराज सिंह ठाकुर (9 वर्ष): इनके पिता राजेश्वर ठाकुर सिविल लाइन थाने में पदस्थ हैं।  
आकाश लकड़ा (13 वर्ष): इनके पिता जोलसा लकड़ा भी पुलिस विभाग में सेवारत हैं। प्रिंस जगत (12 वर्ष): इनके पिता दिवंगत अयोध्या जगत पुलिस लाइन से जुड़े रहे थे। तीनों परिवार पुलिस लाइन परिसर में ही रहते हैं। एक ही परिसर में रहने और बचपन से दोस्ती होने के कारण बच्चों के बीच गहरा लगाव था। इसी वजह से वे अक्सर साथ में खेलते और घूमने जाते थे। पुलिस विभाग में शोक की लहर जैसे ही हादसे की जानकारी मिली, कोरबा के एसपी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। पूरे पुलिस विभाग में इस हादसे को लेकर शोक की लहर फैल गई है। सहकर्मियों और स्थानीय नागरिकों ने भी घटना को बेहद हृदयविदारक बताया।  
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया स्थानीय निवासियों ने बताया कि रिसदी तालाब में सुरक्षा इंतजामों की कमी के कारण इस तरह की घटनाएं पहले भी घट चुकी हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि तालाब के किनारों पर बैरिकेडिंग की जाए और सुरक्षा संकेतक लगाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाएं दोबारा न हों। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल तीनों मासूमों की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस लाइन परिसर का माहौल बेहद गमगीन हो गया है। हर कोई इस बात से आहत है कि एक ही दिन में तीन परिवारों की खुशियां उजड़ गईं।

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