छत्तीसगढ़ में एक लाख पेड़ों की कटाई को अनुमति, 50 करोड़ की वन संपदा पर चलेगी आरी एक लाख पेड़ों की कटाई को अनुमति

छत्तीसगढ़ सरकार ने दो सालों में एक लाख 10 हज़ार से ज्यादा पेड़ों को काटने की अनुमति दी है। इनकी कीमत 50 करोड़ से ज्यादा है। सरकार की रिपोर्ट कहती है कि 20 परियोजनाओं के लिए सरगुजा और बस्तर के जंगलों से यह पेड़ काटे जाएंगे। यह पेड़ 794 वन क्षेत्र में हैं। इनमें सरगुजा के 3 और बस्तर के 7 फॉरेस्ट एरिया शामिल हैं।छत्तीसगढ़ के सरगुजा और बस्तर संभाग में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई है। वन मंत्री केदार कश्यप के मुताबिक 1 जनवरी 2024 से 16 जून 2026 के बीच दोनों संभागों की 20 परियोजनाओं के लिए 793.589 हेक्टेयर वन भूमि में वृक्ष कटाई की स्वीकृति प्रदान की गई।सरकार के अनुसार इस अवधि में सरगुजा संभाग के 3 और बस्तर संभाग के 7, यानी कुल 10 वनमंडलों के अंतर्गत विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों के लिए यह अनुमति दी गई।

इन परियोजनाओं के चलते कुल 1 लाख 10 हजार 663 पेड़ प्रभावित हुए हैं।प्रभावित पेड़ों में से अब तक 85 हजार 413 पेड़ों की कटाई की जा चुकी है। वहीं प्रभावित वृक्षों का अनुमानित मूल्य 50 करोड़ 60 लाख 96 हजार 26 रुपए आंका गया है।सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार यह सभी अनुमतियां विकास एवं निर्माण कार्यों से जुड़ी परियोजनाओं के लिए प्रदान की गई हैं। सरगुजा और बस्तर जैसे वन संपदा से समृद्ध क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर हुई वृक्ष कटाई का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रभावित पेड़ों की संख्या एक लाख से अधिक है, जबकि इनमें से 85 हजार से ज्यादा पेड़ों की कटाई पहले ही पूरी की जा चुकी है।कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा कहती हैं कि सरकार विकास के नाम पर लोगों की सांसें छीन रही है। छत्तीसगढ़ वनों के पेड़ पूरे देश को ऑक्सीजन देते हैं और उन पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई है। इससे पहले अडानी को हसदेव के 4 लाख पेड़ काटने की अनुमति जारी की गई है। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने भी इन पेड़ कटाई का विरोध किया है।एक बार फिर विकास के लिए वनों के विकास की बहस तेज़ हो गई है। सवाल यह पर आदिवासियों की आजीविका के साथ उनके वज़ूद का भी है। सांसो की कीमत पर यह विकास किया जा रहा है।

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