पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन बिल संसद में पेश पेपर लीक कानून
केंद्र सरकार ने पेपर लीक माफिया के खिलाफ संसद में पेश किया पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन बिल।
देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली और पेपर लीक की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सोमवार को संसद में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक’ पेश कर दिया है। लोकसभा में केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस विधेयक को पटल पर रखा, जिसका मुख्य उद्देश्य देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और साख को दोबारा बहाल करना है। बीते कुछ समय से विभिन्न राज्यों और केंद्रीय स्तर की परीक्षाओं में धांधली के कारण देश के करोड़ों परीक्षार्थियों के भविष्य पर उठे सवालों के बीच सरकार ने इस कड़े कानून के जरिए नकल माफियाओं और संगठित गिरोहों को सीधे संदेश देने का प्रयास किया है।

प्रस्तावित कानून में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े कानूनी प्रावधान किए गए हैं। विधेयक के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति या संगठित गिरोह पेपर लीक में दोषी पाया जाता है, तो उसे 10 साल तक की जेल और कम से कम 10 करोड़ रुपये के जुर्माने की सजा दी जाएगी। इसके अलावा, परीक्षा आयोजित कराने वाली निजी सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के दोषी पाए जाने पर उन्हें 8 साल के लिए काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डाल दिया जाएगा। कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधकों और निदेशकों के संलिप्त होने पर उनके लिए भी 10 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये के व्यक्तिगत दंड की व्यवस्था की गई है। वहीं, अगर किसी कोचिंग संस्थान की संलिप्तता साबित होती है, तो उसकी संपत्ति तक जब्त करने की सख्त कार्रवाई होगी।
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क्यों लाना पड़ा संसोधन बिल
बीते कुछ महीनों में देश के कई राज्यों में आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं और राष्ट्रीय स्तर की नीट परीक्षा में धांधली की खबरों के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी असंतोष देखा जा रहा था। जगह-जगह हो रहे विरोध प्रदर्शनों और कानूनी कार्यवाहियों के बीच केंद्र सरकार पर परीक्षा तंत्र को फुलप्रूफ बनाने का भारी दबाव था। पूर्व में बने प्रशासनिक नियमों में संगठित अपराध और तकनीकी धांधली से निपटने के लिए इतने कड़े कानूनी प्रावधान मौजूद नहीं थे। इसी प्रशासनिक कमी को दूर करने और माफिया तंत्र की आर्थिक कमर तोड़ने के इरादे से यह संशोधन विधेयक संसद के समक्ष लाया गया है।
उच्च स्तरीय टास्क फोर्स गठित
विधेयक पेश किए जाने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक विशेष संदेश जारी कर देश भर के अभ्यर्थियों को आश्वासन दिया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री ने बताया कि मुकदमों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, केंद्र सरकार ने पूर्व यूआईडीएआई (UIDAI) प्रमुख नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन कर दिया है। यह टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली में आधुनिक दौर के माध्यमों से पारदर्शिता लाने, मानवीय हस्तक्षेप कम करने और पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार को अपने महत्वपूर्ण सुझाव सौंपेगी।









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