लोक जगत, रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के माना इलाके में प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की है। नकटी गांव में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए सोमवार सुबह प्रशासन की टीम 80 घरों को जमींदोज करने के लिए पहुंची। जैसे ही प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। इस दौरान पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।

भारी संख्या में तैनात थे पुलिस बलगांव के लोगों का विरोध देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। 80 घरों को खाली कराने के लिए पुलिस के करीब 4000 सिपाही तैनात किए गए थे। वहीं 14 बुलडोजरों से कार्रवाई की गई। गांव खाली कराने को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। नोटिस के बाद भी कई बार पुलिस और प्रशासन की टीम बिना कार्रवाई किए लौट चुकी थी।
परिवारों को नवा रायपुर में मिलेगा मकान…प्रशासन ने दावा किया है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की तैयारी शुरू कर दी गई है। उन्हें नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस (EWS) मकानों में बसाने के लिए आवंटन प्रक्रिया जारी है।

क्या है पूरा विवाद…?
दरअसल, मामला 21 मार्च 2025 को सामने आया था। विधानसभा के बजट सत्र में बीजेपी विधायक धर्मजीत सिंह ने सवाल पूछा था कि क्या रायपुर में विधायकों और सांसदों को जमीन देने के लिए कोई प्रस्ताव है। जवाब में राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा था कि हम जमीन नकटी गांव के आसपास देख रहे हैं। जिसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी थी।
प्रशासन का दावा- सरकारी जमीन पर कब्जा…
इस पूरे मामले में प्रशासन का दावा है कि नकटी गांव में जिन मकानों को हटाया गया है वह सरकारी जमीन पर बने हैं। सरकारी जमीन पर गांव वालों ने अवैध कब्जा कर इस जमीन पर घर बनाया था। इसे खाली कराने के लिए ग्रामीणों को कई बार नोटिस दिया गया था लेकिन उसके बाद भी ग्रामीणों ने मकान खाली नहीं किए थे।
ग्रामीणों का दावा- अवैध कब्जा तो लाभ कैसे मिला…
वहीं, प्रशासन के दावे पर ग्रामीणों का कहना है कि वे कई सालों से यहां रह रहे हैं। यह जमीन नकटी गांव का ही हिस्सा है। यहां कई परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान भी मिले हैं। अगर यह सरकारी जमीन है और अवैध कब्जा किया गया है तो फिर यहां रहने वाले लोगों के वोटर आईडी कार्ड, पीएम आवास योजना का लाभ कैसे मिला।








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