लोक जगत, रायपुर, पंडित यशवर्धन पुरोहित। गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म के सबसे प्रिय और उत्साहपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। गणपति बप्पा को बुद्धि, शुभता, समृद्धि और विघ्नों को दूर करने वाला देवता माना जाता है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से की जाती है, क्योंकि उन्हें प्रथम पूज्य कहा गया है।
वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी सोमवार, 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन घरों, मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है। भक्त बप्पा को मोदक, लड्डू, दूर्वा और फूल अर्पित करते हैं। कई जगह यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है और अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ पूरा होता है।
गणेश चतुर्थी 2026 की तिथि
गणेश चतुर्थी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह पर्व 14 सितंबर, सोमवार को पड़ेगा। इस दिन मध्यान्ह काल में भगवान गणेश की पूजा और स्थापना को विशेष शुभ माना जाता है।
गणेश चतुर्थी पर पूजा का समय स्थान के अनुसार थोड़ा बदल सकता है, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना उचित रहता है। जो लोग घर में गणपति स्थापना करते हैं, वे श्रद्धा और शुद्ध मन से पूजा करें। गणेश जी भाव के भूखे हैं, इसलिए पूजा में दिखावे से ज्यादा भक्ति का महत्व होता है।

गणेश चतुर्थी का महत्व
गणेश चतुर्थी का महत्व केवल त्योहार मनाने तक सीमित नहीं है। यह दिन जीवन में शुभ शुरुआत, बुद्धि, धैर्य और सही निर्णय लेने की प्रेरणा देता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, यानी वे बाधाओं को दूर करने वाले देवता हैं।
जब कोई नया काम शुरू किया जाता है, जैसे विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार, पढ़ाई या कोई शुभ कार्य, तो सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। इसका अर्थ यह है कि हम अपने कार्य की शुरुआत सकारात्मक सोच, विनम्रता और बुद्धि के साथ करना चाहते हैं।
भगवान गणेश का स्वरूप भी जीवन की बड़ी सीख देता है। उनका बड़ा सिर ज्ञान और सोच का प्रतीक है। बड़े कान यह बताते हैं कि हमें दूसरों की बात ध्यान से सुननी चाहिए। छोटी आंखें एकाग्रता का संदेश देती हैं। उनका वाहन मूषक यह सिखाता है कि छोटी-से-छोटी चीज भी सही दिशा में लग जाए, तो बड़ा काम कर सकती है।
भगवान गणेश के जन्म की कथा
धार्मिक कथा के अनुसार, माता पार्वती ने अपने उबटन से एक बालक की रचना की और उसमें प्राण डाले। उन्होंने उस बालक को द्वार पर पहरा देने के लिए कहा। जब भगवान शिव वहां आए, तो बालक ने उन्हें भीतर जाने से रोक दिया। शिव जी ने क्रोध में आकर उसका सिर काट दिया।
माता पार्वती के दुखी होने पर भगवान शिव ने उस बालक को फिर से जीवित करने का वचन दिया। इसके बाद हाथी के शिशु का सिर लगाकर उसे नया जीवन दिया गया। यही बालक आगे चलकर भगवान गणेश कहलाए। भगवान शिव ने उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया। इसी कारण हर शुभ काम से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है।
गणपति स्थापना कैसे करें?
गणेश चतुर्थी के दिन घर में गणपति स्थापना करते समय सबसे पहले पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें। वहां लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा ऐसी जगह रखें जहां पूजा आराम से हो सके और वातावरण शांत रहे।
स्थापना से पहले हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर संकल्प लें। इसके बाद गणेश जी को जल अर्पित करें, चंदन लगाएं, दूर्वा चढ़ाएं और फूल अर्पित करें। गणपति बप्पा को मोदक, लड्डू और फल का भोग लगाएं। पूजा में दीपक और धूप जलाएं। इसके बाद गणेश मंत्र का जाप करें और आरती करें।
पूजा के समय यह मंत्र बोला जा सकता है
ॐ गं गणपतये नमः
यह मंत्र सरल है और भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए भक्त श्रद्धा से इसका जाप करते हैं।
गणेश चतुर्थी पूजा सामग्री
गणेश चतुर्थी पूजा के लिए भगवान गणेश की प्रतिमा, लाल या पीला वस्त्र, रोली, अक्षत, चंदन, दूर्वा, फूल, धूप, दीप, फल, नारियल, मोदक, लड्डू, पान, सुपारी और पूजा की थाली रखी जाती है। गणेश जी को दूर्वा और मोदक विशेष प्रिय माने जाते हैं।
यदि सारी सामग्री उपलब्ध न हो, तो भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। साफ मन, श्रद्धा और सच्ची भावना से की गई पूजा भी शुभ मानी जाती है। पूजा का उद्देश्य भगवान गणेश से बुद्धि, शांति और शुभता की प्रार्थना करना है।
गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से क्यों बचते हैं?
गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन से बचने की परंपरा भी मानी जाती है। कथा के अनुसार, चंद्रमा ने भगवान गणेश के स्वरूप का उपहास किया था। इससे गणेश जी ने चंद्रमा को दोष दिया। बाद में चंद्रमा के क्षमा मांगने पर इस दोष को सीमित किया गया।
इसी कारण गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा देखने से बचने की सलाह दी जाती है। यह परंपरा हमें यह भी सिखाती है कि किसी के रूप, शरीर या परिस्थिति का मजाक नहीं बनाना चाहिए। अहंकार और उपहास जीवन में दोष पैदा कर सकते हैं।
गणेशोत्सव और विसर्जन
गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाला उत्सव कई जगह 1 दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या 10 दिन तक मनाया जाता है। महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और देश के कई हिस्सों में गणेशोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। पंडाल सजते हैं, भजन-कीर्तन होते हैं और भक्त बप्पा के दर्शन करने जाते हैं।
उत्सव के अंतिम दिन गणेश विसर्जन किया जाता है। भक्त भगवान गणेश से अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करते हैं और कहते हैं—“गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ।” विसर्जन का भाव यह है कि भगवान गणेश हमारे घर से विदा होते हैं, लेकिन उनका आशीर्वाद और शुभता हमारे जीवन में बनी रहती है।
आज के समय में पर्यावरण का ध्यान रखते हुए मिट्टी की प्रतिमा और प्राकृतिक सजावट का उपयोग करना बेहतर माना जाता है। पूजा के बाद प्लास्टिक, रसायन या प्रदूषण फैलाने वाली चीजों को जल में नहीं डालना चाहिए।
गणेश चतुर्थी पर क्या करें?
इस दिन भगवान गणेश की श्रद्धा से पूजा करें। घर में शांति रखें और परिवार के साथ मिलकर आरती करें। बच्चों को भगवान गणेश की कथा सुनाएं। जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या मिठाई दान कर सकते हैं। यदि गणपति स्थापना कर रहे हैं, तो रोज पूजा, भोग और आरती करें।
गणेश चतुर्थी पर क्या न करें?
इस दिन क्रोध, झूठ, निंदा और गलत व्यवहार से बचना चाहिए। पूजा को दिखावे का माध्यम न बनाएं। गणेश जी बुद्धि और विनम्रता के देवता हैं, इसलिए इस दिन मन को शांत और व्यवहार को मधुर रखना चाहिए। चंद्र दर्शन से बचने की परंपरा का भी ध्यान रखा जाता है।








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