चरस के प्रति छात्रों की दीवानगी से ड्रग के अवैध ऑनलाइन कारोबार

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश का नोएडा उत्तर भारत में नशीले पदार्थों की सबसे ज्‍यादा खपत के मामले में सबसे आगे है, जहां ड्रग तस्कर फर्जी ई-कॉमर्स कंपनी की मदद से शैक्षणिक संस्थानों और कंपनियों में डिलीवरी करते हैं। ग्रेटर नोएडा में विश्‍वविद्यालयों, कॉरपोरेट कंपनियों, शैक्षणिक संस्थानों और यहां तक कि पॉश इलाकों के निवासियों की मांग पर दवा के पैकेट पहुंचाए जा रहे हैं। ग्रेटर नोएडा बीटा-2 पुलिस ने हाल ही में ई-कॉमर्स कंपनी की आड़ में शैक्षणिक संस्थानों और कंपनियों में डिलीवरी करने वाले मारिजुआना और चरस के अवैध व्यापार में लगे एक गिरोह का पर्दाफाश किया।

पुलिस ने मंगलवार को बीबीए की पढ़ाई पूरी कर चुकी छात्रा वर्षा, उसके चचेरे भाई चिंटू ठाकुर को बुलंदशहर से और पिंटू और कालू को उनके सहयोगी जयप्रकाश के साथ गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उनके पास से 20 किलो गांजा, 400 ग्राम चरस और फ्लिपकार्ट के 148 लिफाफे समेत 41 पैकिंग, पॉलिथीन, इलेक्ट्रॉनिक तराजू आदि सामान जब्त किया। गिरोह विश्‍वविद्यालयों और कॉर्पोरेट कंपनियों तक दवाएं पहुंचाने के लिए फ्लिपकार्ट लिफाफे का इस्तेमाल करता था। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ऐप के रूप में इस्तेमाल किए गए लिफाफे संदेह से बच गए।

पुलिस से बचने और अपने ग्राहकों तक आसानी से पहुंचने के लिए, ये गिरोह अलग-अलग कंपनियों के लिफाफों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे मामला कम संदिग्ध हो जाता है। पकड़े गए गिरोह की महिला सदस्य वर्षा ग्रेटर नोएडा के ओमीक्रॉन 2 सेक्टर में मिगसन अल्टीमो सोसायटी में रहती है और मूल रूप से बुलंदशहर की रहने वाली है।

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