लोक जगत, रायपुर। बालोद एसिड अटैक पर गृह मंत्री का इस्तीफ़ा मांगते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा राज में जब खाकी की बेटी सुरक्षित नहीं, तो आम बेटियाँ कैसे रहेंगी महफ़ूज़? बालोद की यह घटना बेहद दर्दनाक, आक्रोश पैदा करने वाली और भाजपा सरकार की लचर कानून व्यवस्था की पोल खोलने वाली है। एक पुलिसकर्मी की बेटी, जो सुरक्षा के माहौल में पली-बढ़ी है, वह भी अगर खुलेआम एसिड अटैक का शिकार हो रही है और आरोपी पैदल फरार हो जाता है, तो यह बताता है कि अपराधियों के मन से कानून का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा के कुशासन में आज छत्तीसगढ़ एक बेहद शर्मनाक और खौफनाक दौर से गुजर रहा है। बालोद में जो हुआ, उसने पूरे प्रदेश की आत्मा को झकझोर कर रख दिया है। एक पुलिसकर्मी की बेटी पर सरेराह एसिड फेंका जाता है और दरिंदा बड़े आराम से पैदल फरार हो जाता है। यह सिर्फ एक बेटी पर हमला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की कानून-व्यवस्था के मुंह पर तमाचा है। विष्णुदेव साय सरकार में अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ चुका है कि उन्हें पुलिस और कानून का रत्ती भर भी डर नहीं रहा। अगर पुलिस परिवार की बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, तो आम छत्तीसगढ़िया परिवार अपनी बेटियों को किस भरोसे बाहर भेजेगा?“
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा ”सुशासन“ और ”अपराधमुक्त छत्तीसगढ़“ का ढोल पीटती है, लेकिन हकीकत यह है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। बालोद में दिनदहाड़े एक पुलिसकर्मी की बेटी पर एसिड अटैक होना और आरोपी का आराम से पैदल फरार हो जाना, छत्तीसगढ़ पुलिस के गश्त और खौफ के दावों की हवा निकालता है। जब पुलिसकर्मी का परिवार ही सुरक्षित नहीं, तो आम जनता का क्या होगा? आरोपी का पैदल भाग जाना यह साबित करता है कि शहर में पुलिसिंग नाम की कोई चीज़ नहीं बची है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा ने महतारी वंदन के नाम पर सिर्फ छलावा किया है, असली महतारी वंदन बहनों को ‘सुरक्षा और सम्मान’ देना है, जो यह सरकार देने में नाकाम रही है। एसिड की खुलेआम बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट के कड़े दिशा-निर्देशों के बावजूद छत्तीसगढ़ में इस पर कोई प्रशासनिक नियंत्रण नहीं है। पुलिस परिवार की बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, तो आम गरीब, किसान और मजदूर परिवार की बेटियों की सुरक्षा का क्या हाल होगा? आज प्रदेश की माताओं और बहनों के मन में डर का माहौल व्याप्त है। कहाँ है डायल 112 का खौफ? पिछले 10 महीनों में प्रदेश में महिला अपराधों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है, क्या गृह विभाग सिर्फ ट्रांसफर-पोस्टिंग उद्योग चलाने में व्यस्त है? जब राजधानी से लेकर जिलों तक पुलिस अलर्ट का दावा किया जाता है, तो एसिड फेंकने वाला आरोपी दिनदहाड़े वारदात को अंजाम देकर ‘पैदल’ कैसे फरार हो गया? छत्तीसगढ़ में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि कानून हाथ जोड़कर खड़ा है और अपराधी तेज़ाब लेकर खुलेआम घूम रहे हैं।







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