अदाकारी से आगे: जब नाना पाटेकर ने पर्दे के साथ-साथ सेना की वर्दियों और शूटिंग रेंज में भी बनाई अलग पहचान…

लोक जगत, मुंबई। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर केवल अपने बेबाक अभिनय और दमदार संवाद अदायगी के लिए ही नहीं जाने जाते, बल्कि उनका जीवन असल जिंदगी में भी अनुशासन, देशप्रेम और बहुमुखी प्रतिभा का बेहतरीन उदाहरण है। बहुत कम लोग जानते हैं कि सिनेमाई पर्दे पर क्रांति लाने वाले नाना का भारतीय सेना और राष्ट्रीय स्तर के खेलों से बेहद गहरा और वास्तविक जुड़ाव रहा है।

‘प्रहार’ के लिए ली 3 साल की सख्त सैन्य ट्रेनिंग…
वर्ष 1991 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ नाना पाटेकर के करियर का एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुई। इस फिल्म के निर्देशन के साथ-साथ उन्होंने इसमें एक सख्त आर्मी अफसर ‘मेजर चौहान’ की भूमिका निभाई थी। रोल में स्वाभाविकता और सैन्य अनुशासन लाने के लिए नाना ने केवल अभिनय का सहारा नहीं लिया, बल्कि भारतीय सेना के मराठा लाइट इन्फेंट्री रेजीमेंट के साथ लगातार 3 साल तक कठिन मिलिट्री ट्रेनिंग हासिल की।

इस ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने जवानों के साथ मिलकर रनिंग, शूटिंग और सर्वाइवल स्किल्स सीखे। उनकी इस लगन और समर्पण को देखते हुए भारतीय सेना ने उन्हें कैप्टन की मानद रैंक (Honorary Captain) से भी सम्मानित किया।

1999 के कारगिल युद्ध में दी अपनी सेवाएं…
नाना पाटेकर का देशप्रेम केवल शूटिंग सेट तक सीमित नहीं रहा। 1999 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध छिड़ा, तब नाना पाटेकर ने बिना किसी झिझक के देश की सेवा के लिए आगे बढ़कर योगदान दिया। उन्होंने कारगिल क्षेत्र का दौरा कर जवानों का हौसला तो बढ़ाया ही, साथ ही मराठा लाइट इन्फेंट्री रेजीमेंट के साथ मिलकर फ्रंटलाइन के करीब सेवाएं भी दीं।
नेशनल शूटिंग में लहराया परचम
अभिनय और सेना के प्रति जुनून के साथ-साथ नाना पाटेकर एक बेहतरीन राइफल शूटर भी रहे हैं। उन्होंने पेशेवर स्तर पर राइफल शूटिंग का अभ्यास किया और नेशनल राइफल शूटिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर मेडल भी अपने नाम किया। खेल के प्रति उनके इस जज्बे ने साबित किया कि उनकी एकाग्रता केवल कैमरे के सामने ही नहीं, बल्कि निशाना साधते वक्त भी अचूक रहती है।

अनुशासन और सादगी की मिसाल
सिनेमा, सेना और खेल—इन तीनों क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ने के बावजूद नाना पाटेकर अपने बेहद सादे और जमीन से जुड़े स्वभाव के लिए पहचाने जाते हैं। आज के समय में, जब स्टारडम के साथ ग्लैमर हावी रहता है, नाना पाटेकर का यह अनुशासित और बहुआयामी जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

इन्हीं दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का आज (8 अक्टूबर 2026) 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। गोवा स्थित उनके आवास पर तड़के कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) पड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

अलविदा नाना पाटेकर…

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