लोक जगत, रायपुर। भाजपा सरकार ने पीएससी को मजाक बना दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि एक माह में पीएससी की दो महत्वपूर्ण परीक्षाएं स्थगित की गयी है। पहले सिविल सेवा 2025 के साक्षात्कार को स्थगित किया गया, अब पुलिस एसआई और सूबेदार की परीक्षा को दोबारा स्थगित कर दिया गया। पीएससी भाजपा के शासनकाल में अपने कलेंडर का भी कड़ाई से पालन नहीं कर पा रही। इसके पहले एसआई भर्ती परीक्षा के परिणाम में अभ्यर्थियों के नामों में गड़बड़ी हुई थी।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पीएससी 2025 की सिविल सेवा परीक्षा के मुख्य परीक्षा में 1ः3 का पालन नहीं किया गया, इंटरव्यू के निर्धारित संख्या में अभ्यर्थी इंटरव्यू नहीं पहुंच पाये। पीएससी की सब इंस्पेक्टर परीक्षा में अजीबो-गरीब नाम के अभ्यर्थी के उत्तीर्ण घोषित किये गये, क्या यही यूपीएससी की तर्ज पर पीएससी की परीक्षा है। भाजपा की सरकार बनने के बाद पीएससी की भर्ती परीक्षा को मजाक बनाकर रख दिया गया है। पीएससी की उत्तर पुस्तिकाएं कौन जांच रहा है, उनके नाम सोशल मीडिया में फैला हुआ था। आयोग ने 2025 की परीक्षा को मुख्य परीक्षा में 265 पदों के विरूद्ध 795 अभ्यर्थियों का इंटरव्यू के लिये चयनित नहीं किया है। आयोग ने केवल 608 अभ्यर्थियों को ही इंटरव्यू के लिये योग्य माना है। साक्षात्कार 187 अभ्यर्थी कम पहुंचे है, जो 1ः3 के नियम के विरुद्ध है। पीएससी का कहना है कि 187 अभ्यर्थी न्यूनतम 66 और 46 नंबर नहीं प्राप्त कर पाये है। आयोग 2025 के मुख्य परीक्षा की कॉपी भी अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराये ताकि अभ्यर्थी उनको दिये गये नंबरों का स्वमूल्यांकन कर संतुष्ट हो सके।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पीएससी भाजपा राज में अनियमितता और गड़बड़ी का केंद्र बन गया है। सरकार पीएससी को लेकर कितना लापरवाह है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आयोग के अध्यक्ष का पद एक महीने से अधिक समय से खाली पड़ा है। जब अध्यक्ष ही नहीं रहेगा तो परीक्षायें कैसे आयोजित होंगी?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि 2024 की परीक्षा में अभ्यर्थियों की जो उत्तर पुस्तिका सामने आयी है, उसके अनुसार मूल्यांकन में बड़े पैमाने पर गड़बड़िया सामने आई थी। अभ्यर्थियो को नंबर गलत दिये गये थे। इसलिये यदि आयोग का दावा है कि उसके मूल्यांकन में 187 अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिये योग्य नही है तो उसे इसे प्रमाणित करने उत्तर पुस्तिकाये अभ्यर्थियो को इंटरव्यू के पहले उपलब्ध करवाना चाहिये।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सीजीपीएससी स्पष्ट करे कि परीक्षायें और इंटरव्यू स्थगित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी, मूल्यांकन और शॉर्टलिस्टिंग को लेकर उठे सवालों की स्थिति क्या है, नई तारीख कब घोषित होगी तथा अभ्यर्थियों की आशंकाओं का निराकरण किस प्रक्रिया से किया जाएगा। कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता केवल परीक्षा कराने से नहीं, बल्कि हर चरण में पारदर्शिता से सुनिश्चित होना चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा सरकार की दुर्भावना से ही भर्ती प्रक्रिया बाधित हो रही है। शिक्षक भर्ती में जानबूझकर रोस्टर और दिव्यांगों के आरक्षण का पालन नहीं किया गया जिसकी वजह से हाई कोर्ट में रोक लगी। कामधेनू विश्वविद्यालय दुर्ग में आरक्षण और रोस्टर की गड़बड़ियों के कारण राजभवन ने रोक लगाई है। प्रदेश में डॉक्टरों के 80 प्रतिशत पद रिक्त है। विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर के 71 प्रतिशत पद रिक्त है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 57 हजार से ज्यादा पद रिक्त है। वन विभाग, पुलिस विभाग, सहकारिता सहित लगभग सभी सरकारी विभागों में यही स्थिति है। यह सरकार नहीं चाहती कि प्रदेश के युवाओं को सरकारी नौकरी मिले। मोदी की गारंटी के नाम पर किया गया 1 लाख सरकारी नौकरी का वादा जुमला साबित हो गया है।







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