अयोध्या, रामपथ पर साकार हुई त्रेतायुग की रामायण, 21 भव्य झांकियों ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर…

लोक जगत, लखनऊ। दसवें दीपोत्सव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के स्वरूपों के स्वागत, राजतिलक, पुष्पवर्षा और दीप प्रज्ज्वलन के कार्यक्रमों के माध्यम से रामनगरी ने अपनी आध्यात्मिक विरासत का भव्य प्रदर्शन किया।
रामनाम की गूंज, भक्ति का उत्साह और लाखों दीपों की अलौकिक रोशनी… दसवें दीपोत्सव पर रामनगरी अयोध्या एक बार फिर ऐसी दिव्य छटा से नहा उठी, मानो त्रेतायुग की अयोध्या धरती पर उतर आई हो। सरयू के पावन तट पर दीप प्रज्ज्वलन के साथ आस्था का ऐसा विराट दृश्य साकार हुआ, जिसने दीपोत्सव को एक बार फिर ऐतिहासिक बना दिया। सरयू की लहरों के किनारे टिमटिमाते दीप, मंदिरों की जगमगाहट और आकाश में गूंजते जय श्रीराम के उद्घोष ने हर श्रद्धालु को रामभक्ति के भाव में सराबोर कर दिया।

दसवें दीपोत्सव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के स्वरूपों के स्वागत, राजतिलक, पुष्पवर्षा और दीप प्रज्ज्वलन के कार्यक्रमों के माध्यम से रामनगरी ने अपनी आध्यात्मिक विरासत का भव्य प्रदर्शन किया। राम की पैड़ी पर सरयू आरती के साथ दीपों की रोशनी ने ऐसा दृश्य उपस्थित किया, जिसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। हर ओर दीपों की कतारें थीं और हर हृदय में प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट श्रद्धा।

इस बार दीपोत्सव की भव्यता केवल दीपों तक सीमित नहीं रही। रामपथ पर निकली शोभायात्रा ने रामायण के सातों कांडों को जीवंत कर दिया। साकेत महाविद्यालय से पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने हरी झंडी दिखाकर शोभायात्रा रवाना की। लगभग तीन किलोमीटर का सफर तय करके यह रामकथा पार्क पहुंची। शोभायात्रा में शामिल 21 भव्य झांकियों में सात झांकियां रामायण के सातों कांडों पर आधारित थीं, जबकि 14 झांकियों के माध्यम से योगी सरकार की विकास यात्रा को प्रदर्शित किया गया।

बालकांड में प्रभु श्रीराम के जन्म और बाल लीलाओं से लेकर अयोध्याकांड के वनगमन, अरण्यकांड के वनवास, किष्किन्धाकांड में हनुमान-सुग्रीव मिलन, सुंदरकांड में बजरंगबली के अद्भुत पराक्रम और लंकाकांड में रावण के साथ युद्ध के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को रामकथा का सजीव दर्शन कराया। उत्तरकांड की झांकी ने इस आध्यात्मिक यात्रा को पूर्णता प्रदान की।

ढोल-नगाड़ों की गूंज ने उत्सव में चार चांद लगा दिए। महिला कलाकारों ने कंधों पर ढोल रखकर ऐसी थाप दी कि पूरा रामपथ झूम उठा। विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकारों के नृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने अयोध्या को सांस्कृतिक एकता के विराट मंच में बदल दिया। कहीं रामभक्त हाथ जोड़कर प्रभु के स्वरूपों के दर्शन कर रहे थे तो कहीं श्रद्धालुओं की आंखें भक्ति के भाव से नम दिखाई दे रही थीं।

झांकियों में जल जीवन मिशन, आयुष्मान योजना, मिशन शक्ति, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम सूर्य घर योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर सहित विभिन्न योजनाओं को भी स्थान दिया गया। शाम को राम की पैड़ी पर सरयू आरती, दीप प्रज्ज्वलन, प्रोजेक्शन मैपिंग, लेजर शो और ड्रोन शो ने उत्सव को आधुनिक तकनीक के रंगों से सजाया। सरयू पुल के निकट हरित आतिशबाजी और रामकथा पार्क में रामलीला के आयोजन ने दीपोत्सव की दिव्यता को और बढ़ाया।

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि दीपोत्सव अब केवल उत्तर प्रदेश का आयोजन नहीं, बल्कि पूरे विश्व का पर्व बन चुका है। हर वर्ष दीपोत्सव अपना ही पिछला रिकॉर्ड तोड़ता है और इस बार भी नया कीर्तिमान स्थापित किया गया।

दसवें दीपोत्सव ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि अयोध्या केवल एक नगर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का केंद्र है। सरयू के तट पर प्रज्ज्वलित हर दीप मानो प्रभु श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा और प्रकाश का संदेश दे रहा था। दीपों की इस दिव्य श्रृंखला में अयोध्या ने दुनिया को दिखा दिया कि रामभक्ति की ज्योति समय के साथ और अधिक प्रखर होती जा रही है।

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