मुख्यमंत्री भूपेश बघेल देश के दूसरे सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का लोकप्रियता में और इजाफा हुआ है। वह देश के सर्वाधिक लोकप्रिय मुख्यमंत्रियों में दूसरे स्थान पर है। सर्वे में 59.1 प्रतिशत लोगों ने उनके कामकाज पर संतुष्टि जताई है। यह सर्वेक्षण रिपोर्ट इंडिया टूडे ने अभी हाल ही में प्रकाशित की है। इंडिया टूडे समूह द्वारा देश भर में आम नागरिकों से मुख्यमंत्रियों के कामकाज के संबंध में किये गये सर्वे में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की लोकप्रियता में और इजाफा हुआ है। उनकी सरकार के कामकाज पर 59.1 प्रतिशत लोगों ने भरोसा जताया है। इंडिया टूडे द्वारा मुख्यमंत्रियों की लोकप्रियता के लिए जनवरी 2023 में कराए गए सर्वे में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के कामकाज पर 55.7 प्रतिशत लोगों ने संतुष्टि जताई थी। इसके पूर्व वर्ष में हुए सर्वे में 53.3 प्रतिशत ने मुख्यमंत्री बघेल के कामकाज को सराहा था।

 
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित विभिन्न न्याय योजनाओं की बदौलत पौने पांच सालों में राज्य के 40 लाख लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आ चुके हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की न्याय योजनाएं गरीबी को दूर करने में बेहद असरकारक साबित हुई हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने बीते पौन पांच सालों में अपनी न्याय योजनाओं जैसे- राजीव गांधी किसान न्याय योजना, गोधन न्याय योजना, राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना, बेरोजगारी भत्ता, राजीव मितान क्लब, के माध्यम से राज्य के ग्रामीणों, किसानों, पशुपालकों, महिलाओं, युवाओं, वनोपज संग्राहकों सहित सभी वर्ग के हितग्राहियों को पौने दो लाख करोड़ रूपए की सीधी मदद दी है, जिसके चलते लोगों के जीवन में बदलाव आया है और वह आर्थिक रूप से समृद्ध हुए हैं।
 
छत्तीसगढ़ सरकार की न्याय योजनाओं बदौलत पौने पांच सालों में प्रति व्यक्ति का 88,793 रूपए से बढक़र 1,33,898 रूपए हो गई है। इस अवधि में छत्तीसगढ़ का जीएसडीपी 3,27,106 करोड़ रूपए से बढक़र 5,09,043 करोड़ रूपए हो गयी है। मार्च 2020 से निरंतर दो वर्ष तक कोविड-19 आपदा के कारण आर्थिक गतिविधियां मद होने के बावजूद राज्य शासन की नीतियों और न्याय योजनाओं के चलते अर्थव्यवस्था के आकार में 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2022-23 में कृषि, औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र में छत्तीसगढ़ राज्य की विकास दर राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा रही है।
 
छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है। राज्य के लगभग 74 प्रतिशत लोगों का जीवनयापन का आधार खेती-किसानी पर निर्भर है। छत्तीसगढ़ सरकार ने बीते पौने पांच सालों में खेती-किसानी को समृद्ध और किसानों की खुशहाली के लिए जो फसले लिए हैं और योजनाएं संचालित की है। उससे राज्य में खेती-किसानी के प्रति लोगों का उत्साह बढ़ा है। किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य दिलाने के मामले में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक मिसाल कायम की है। छत्तीसगढ़ देश का एक मात्र राज्य है, जहां किसानों को धान का सर्वाधिक मूल्य मिल रहा है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करने के साथ ही सरकार खरीफ फसलों के उत्पादक किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत प्रति एकड़ के मान से 9000 रूपए की इनपुट सब्सिडी दे रही है। वर्ष 2019-20 से लेकर अब तक इस योजना के तहत किसानों को लगभग 22 हजार करोड़ रूपए की सीधी मदद उनके बैंक खातों में भेजी गई है।
 
छत्तीसगढ़ सरकार की सुराजी गांव योजना नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी विकास कार्यक्रम और गोधन न्याय योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाने के साथ ही लोगों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में कारगर रही है। नरवा विकास कार्यक्रम के चलते राज्य के लगभग 14 हजार बरसाती नालों के ट्रीटमेंट से जल संरक्षण में मदद मिली है, जिसके चलते भू-जल स्तर सुधरा है। सिंचाई की सुविधा और दोहरी फसलों का रकबा बढ़ा है। गरवा कार्यक्रम के माध्यम से पशुधन का संरक्षण-संवर्धन हुआ है। पशुपालन से लोगों की आय बढ़ी है। घुरवा और बाड़ी विकास कार्यक्रम ने राज्य में जैविक खेती और पोषण स्तर को बेहतर बनाने में मदद मिली है।
 
छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना से रोजगार और आत्मनिर्भरता के बहुआयामी विकल्प सृजित हुए है। इस योजना के तहत सरकार द्वारा दो रूपए में किलो में गोबर और चार रूपए लीटर में गौमूत्र की खरीदी ने ग्रामीण पशुपालकों को अतिरिक्त आय का जरिया दिया है। गोबर से वर्मी कम्पोस्ट एवं अन्य सामग्रियों का निर्माण, गौमूत्र से जैविक कीटनाशक, ब्रम्हास्त्र और जीवामृत का उत्पादन, गोबर से प्राकृतिक पेंट का निर्माण और विक्रय से लोगों की आय में वृद्धि हुई है। गौठानों से जुड़ी 12 हजार से अधिक स्व-सहायता की दो लाख महिलाएं विभिन्न आयमूलक अपनाकर आर्थिक रूप से सशक्त हुई है।

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