लीज की जमीन को फर्जी तरीके से बेचा

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रायपुर। डीकेएस हॉस्पिटल शास्त्री चौक के सामने की शासन की बेशकीमती जमीन को अवैध तरीके से कूटरचना कर बेचने को लेकर आशीष देव सोनी की याचिका पर हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों के जबाव पर नाराजगी जताते हुए फिर से नोटिस भेजकर सात दिन के अंदर जवाब मांगा है। राजधानी में मुख्य मार्गों की जमीनों की खरीदी को लेकर कोई प्लानिंग करें या न करें बिल्डरों ने इस पर बहुत पहले ही प्लानिंग कर मुख्य मार्गो की ऐसी जमीन और उससे लगे जमीन तथा उसके पीछे की जमीन को खरीदने में एड़ी चोटी एक कर दी थी। इसके पीछे बिल्डरों का एक ही स्वार्थ था कि फ्रंट की जमीन कैसे भी करके खरीद लो बैक वाली जमीन तो मालिक खुद-ब-खुद बेच देगा और वही हो रहा है। नथ्थानी बिल्डर द्वारा राजधानी के डीकेएस अस्पताल के सामने शास्त्री चौक पर शासन द्वारा लीज़ पर मिले भूमि को खुद की बताकर करोडो में बेचने के मामले में आशीष देव सोनी की जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा संज्ञान में लेकर सम्बंधित पक्ष को नोटिस जारी किया है। गौरतलब है कि राजधानी के ह्रदय स्थल शास्त्री चौक की बेशकीमती खली पड़ी जमीन पर बिल्डरों की नजऱ तो लगी हुई थी और जैसे तैसे लोगों को गुमराह कर लीज़ की जमींन को खुद की बताकर गुपचुप तरीके से बेच भी दी। मजे की बात ये भी कही कि उक्त चौक पर रोजाना बड़े से बड़े नेताओं और कलेक्टर सहित नगर निगम के अधिकारियो का आनाजाना लगा रहता है उसके बावजूद किसी का ध्यान उस ओर नहीं गया। वहीँ किसी गरीब आदमी जो अपने गाढ़े पसीने की कमाई से अगर छोटा मोटा निर्माण कार्य शुरू कर दे तो तुरंत निगम का अमला सक्रिय होकर उसे तोड़ देता है। लेकिन इतने बड़े पैमाने पर हो रहे निर्माण कार्यो की ओर किसी का ध्यान नहीं जाना संदेह को जन्म देता है। निगम और राजस्व अधिकारियों की मिली भगत निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की मिली भगत कुछ दिनों बाद फिर बिल्डर निगम और टाउनएंड कंट्री प्लानिंग की मिली लेआउट पास कराया और उसमें कामर्शियल बिल्डिंग तान कर सरकार का करोड़ों का राजस्व नुकसान किया। बिना इनके मिलीभगत के काम शरू कैसे हो सकता है।

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