लोक जगत, रायपुर। छत्तीसगढ़ में दशहरे पर शस्त्र पूजन के दौरान फायरिंग को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजनांदगांव की SP अंकिता शर्मा के AK-47 चलाने का वीडियो चर्चा में रहने के बीच अब मोहला-मानपुर के पुलिस अधीक्षक वाईपी सिंह और उनके बेटे से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा किया जा रहा है। वीडियो को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि क्षेत्रीय कांग्रेस विधायक इंद्रशाह मंडावी ने मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि, इस मामले में पुलिस की ओर से सामने आया पक्ष भी महत्वपूर्ण है। राजनांदगांव रेंज के IG अजय यादव के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, वायरल वीडियो पुराना है। ऐसे में वीडियो की वास्तविक तारीख और उसमें दिखाई दे रही गतिविधियों की परिस्थितियों की पुष्टि जरूरी है।
भूपेश बघेल ने सरकार से पूछे सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वायरल वीडियो को लेकर सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए। उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल किया कि जब कानून की रक्षा करने वालों पर ही नियमों के उल्लंघन के आरोप लगें, तो आम जनता के बीच क्या संदेश जाएगा?
बघेल ने यह भी पूछा कि SP के बेटे को फायरिंग करने की अनुमति किस आधार पर दी गई और मामले में आर्म्स एक्ट के तहत अब तक क्या कार्रवाई हुई है। उनके सवालों ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
विधायक इंद्रशाह मंडावी ने उठाई जांच की मांग
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी के कांग्रेस विधायक इंद्रशाह मंडावी ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, पुलिस महानिदेशक और रेंज IG को पत्र लिखकर मामले में स्थिति स्पष्ट करने तथा नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग उठाई।
विधायक का सवाल है कि यदि आम नागरिकों के लिए हथियारों के इस्तेमाल को लेकर नियम निर्धारित हैं, तो पुलिस अधिकारियों के परिवार के सदस्यों के मामले में भी उन्हीं नियमों के पालन की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
पुलिस का पक्ष: पुराना बताया जा रहा वीडियो
दूसरी ओर, वायरल वीडियो को लेकर पुलिस की ओर से यह पक्ष सामने आया है कि वीडियो हाल का नहीं, बल्कि पुराना है। रिपोर्टों में रेंज IG अजय यादव के हवाले से बताया गया है कि दशहरे पर पुलिस विभाग में शस्त्र पूजन के दौरान फायरिंग की परंपरा रही है।
हालांकि, वीडियो किस तारीख का है, उसमें वास्तव में क्या हुआ था और संबंधित व्यक्ति की भूमिका क्या थी—इन सवालों पर स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने आना जरूरी है। केवल वायरल वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
अंकिता शर्मा के वीडियो के बाद बढ़ी चर्चा
इससे पहले राजनांदगांव की SP अंकिता शर्मा का दशहरे पर शस्त्र पूजन के दौरान AK-47 से फायरिंग करते हुए वीडियो वायरल हुआ था। इस मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा था। इसके बाद प्रदेश में शस्त्र पूजन के दौरान फायरिंग, हथियारों की सुरक्षा और पुलिस विभाग के निर्धारित प्रोटोकॉल को लेकर बहस तेज हुई।
शस्त्र पूजन धार्मिक और पारंपरिक आयोजन है, लेकिन हथियारों का इस्तेमाल सुरक्षा नियमों के अनुरूप होना भी जरूरी है। ऐसे मामलों में वीडियो की सत्यता, घटना की तारीख, हथियार के इस्तेमाल की परिस्थितियों और लागू नियमों की निष्पक्ष जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।
फिलहाल, मोहला-मानपुर के SP और उनके बेटे से जुड़े वायरल वीडियो को लेकर राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं, जबकि पुलिस पक्ष इसे पुराना बता रहा है। अब इस पूरे मामले में वीडियो की तारीख, वास्तविक घटनाक्रम और आधिकारिक जांच की स्थिति स्पष्ट होना अहम होगा।








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