सरकार की लापरवाही से धान सड़ रहा, शार्टेज हो रहा – कांग्रेस

लोक जगत, रायपुर। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में धान खरीदी के साथ-साथ उठाव और कस्टम मिलिंग का समयबद्ध चक्र चलता था, मिलर्स के लिए 72 घंटे के भीतर उठाव का नियम था, मिलिंग करके 67 प्रतिशत चावल तय समय के भीतर शासन में जमा करने का नियम था, एक-एक दाना सुरक्षित गोदामों तक पहुँचता था, जिसकी अवहेलना भ्रष्टाचार की नियत से भाजपा की सरकार कर रही है। सरकार और उनके चहेते चंद मिलरों की सांठगांठ के कारण धान सड़ने का नाटक रचा जा रहा है, ताकि बाद में इसे रद्दी बताकर कौड़ियों के दाम बेचा जा सके या घपलेबाजी पर पर्दा डाला जा सके। छत्तीसगढ़ ‘धान का कटोरा’ है और अन्नदाता का धान हमारे लिए पूजा के समान है। भाजपा सरकार के राज में अन्न का सड़ना छत्तीसगढ़िया अस्मिता, किसान के पसीने और लक्ष्मी स्वरूपी धान का घोर अपमान है। समय पर धान नही उठने से चोरी हो रही है और शार्टेज भी आ रहा है।

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि जब खरीदी का शेड्यूल तय था, तो बैकअप प्लान और मिलरों से एग्रीमेंट की शर्तों का कड़ाई से पालन क्यों नहीं कराया गया? क्या सरकार इतनी कमज़ोर है कि तय समय में चावल जमा नहीं करने वाले मिलर उस पर हावी हैं? खरीदी केंद्र और संग्रहण केंद्रों में सड़ रहे धान का जिम्मेदार कौन है, खाद्य मंत्री या वे अफसर जिन्हें राइस मिलरों पर कार्रवाई करने से रोका जा रहा है? कस्टम मिलिंग के लिए तय समय-सीमा बीत जाने के बावजूद राइस मिलरों पर अब तक एग्रीमेंट के तहत कड़े कानूनी प्रावधान लागू क्यों नहीं किए गए? खुले में सड़ रहे धान से हुए करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान की भरपाई क्या संबंधित जिम्मेदारों की जेब और उन राइस मिलरों से वसूली करके की जाएगी? क्या धान को जानबूझकर सड़ाया जा रहा है ताकि बाद में इसे राइस मिलरों को ‘डैमेज्ड पैडी’ के नाम पर कौड़ियों के भाव बेचकर बड़ा घोटाला अंजाम दिया जा सके? कांग्रेस सरकार के समय जब रिकॉर्ड धान खरीदी के साथ त्वरित उठाव हो सकता था, तो ‘डबल इंजन’ की सरकार में धान संभालने में हाथ-पांव क्यों फूल रहे हैं? यह केवल प्रशासनिक नाकामी नहीं, बल्कि सरकार के चहेते चंद राइस मिलरों और भाजपा सरकार का सुनियोजित ‘धान सड़न घोटाला’ है।

समर्थन मूल्य पर उपार्जित लाखों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे आज भी सड़ रहा है। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि राइस मिलरों और शासन के बीच कथित साठगांठ या प्रशासनिक नाकामी के कारण कस्टम मिलिंग का धान समय पर जमा नहीं हो रहा है, आज भी स्थिति यह है कि 11 मिलर्स ने पिछले खरीफ सीज़न में 10 हजार मीट्रिक टन धान उठाया और आज तक एक किलों चावल भी शासन को जमा नहीं कराया, जिससे जनता का करोड़ों रुपये का खून-पसीने का पैसा पानी में बह रहा है। बफर स्टॉक प्रबंधन में भारी विफलता और भंडारण व्यवस्था की व्यवस्थागत अनदेखी से भ्रष्टाचार प्रमाणित हो रहा है।

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