लोक जगत, वाशिंगटन/नई दिल्ली। अमरीकी सियासत में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहाँ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पार्टी (रिपब्लिकन) को चुनावी मैदान में भारी पराजय का सामना करना पड़ा है। हालिया चुनावी नतीजों के अनुसार, विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमरीकी संसद के दोनों प्रमुख सदनों—सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (प्रतिनिधि सभा)—पर अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया है।
गढ़ माने जाने वाले राज्यों में भी पिछड़ी रिपब्लिकन पार्टी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डेमोक्रेट्स ने उन क्षेत्रों में भी शानदार जीत दर्ज की है जिन्हें लंबे वक्त से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत दुर्ग माना जाता था। पार्टी ने सीनेट में कम से कम छह ऐसी सीटें झटक ली हैं, जहाँ पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन का दबदबा रहा था। इनमें टेक्सास और कंसास जैसे बड़े और अहम राज्य भी शामिल हैं। इसके साथ ही, प्रतिनिधि सभा के चुनावों में भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार लगातार आगे चल रहे हैं।

इन मुद्दों पर जनता ने जताया गुस्सा…
विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनावी नतीजे के पीछे आम जनता का मौजूदा प्रशासन की नीतियों से मोहभंग होना है। देश में लगातार बढ़ती महंगाई, आव्रजन से जुड़े नियम और विदेश नीति से जुड़े कुछ फैसले मतदाताओं के बीच बड़े मुद्दे बने रहे। इसका असर प्रांतीय स्तर पर भी देखने को मिला, जहाँ टेक्सास, ओहायो, आयोवा और जॉर्जिया जैसे राज्यों में डेमोक्रेटिक पाटी के गवर्नर उम्मीदवारों ने बाजी मार ली है।
ट्रंप की प्रतिक्रिया…
उधर, चुनावी परिणामों पर अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि चूँकि वह खुद सीधे तौर पर इस चुनाव के मैदान में नहीं थे, इसलिए परिणामों को व्यक्तिगत हार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका दावा है कि यदि वे स्वयं चुनाव लड़ रहे होते, तो पार्टी को ऐतिहासिक बहुमत मिलता। हालाँकि, व्हाइट हाउस के रुख में अभी भी काफी सख्ती बनी हुई है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संसद के दोनों सदनों पर नियंत्रण खोने से आने वाले समय में राष्ट्रपति के लिए नीतिगत फैसले लेना काफी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।







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