लोक जगत, रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने प्रदेश की मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर हुई कटौती को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में विभिन्न सरकारों ने अपने-अपने कार्यकाल में प्रदेश के विकास में योगदान दिया है, लेकिन वर्तमान में सबसे बड़ा संकट हमारे लोकतंत्र और आम नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा पर आन पड़ा है।

जोगी से लेकर बघेल सरकार तक के कार्यकाल का जिक्र…
मोहम्मद अकबर ने छत्तीसगढ़ के राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि राज्य गठन के बाद प्रथम मंत्रिमंडल का हिस्सा रहते हुए उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की नींव रखे जाने से लेकर डॉ. रमन सिंह और भूपेश बघेल के कार्यकाल को देखा है। हर सरकार ने अपने-अपने स्तर पर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर और जनहित के कार्यों में योगदान दिया है। हालांकि, आज विकास की चर्चा से इतर लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत रखने की चुनौती सामने खड़ी है।
चुनाव में हार-जीत के अंतर से चार गुना अधिक कटे नाम…
2023 के विधानसभा चुनाव आंकड़ों का हवाला देते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि पिछले चुनाव में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच कुल जीत-हार का अंतर मात्र 6 लाख 32 हजार वोट (4.04%) था। जबकि, हालिया एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के माध्यम से छत्तीसगढ़ में 24 लाख 99 हजार मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “जब प्रदेश की आबादी लगातार बढ़ रही है, तो ऐसे में इतनी भारी संख्या में मतदाताओं के नाम कम होने का आधार क्या है? यह आंकड़ा चुनाव के हार-जीत के अंतर से लगभग चार गुना अधिक है, जो चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।”
‘यह किसी दल का नहीं, बल्कि मताधिकार की सुरक्षा का मुद्दा’
मोहम्मद अकबर ने स्पष्ट किया कि उनकी यह लड़ाई किसी विशेष राजनीतिक दल के लाभ या हानि के लिए नहीं है, बल्कि प्रत्येक पात्र नागरिक के संवैधानिक अधिकार और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए है।
उन्होंने जोर देकर कहा:
“लोकतंत्र में हर एक वोट की अहमियत होती है। हमारा संकल्प और संघर्ष यही है कि छत्तीसगढ़ का कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न हो। हम चुनाव की निष्पक्षता और जनता के अधिकार की रक्षा के लिए हर स्तर पर अपनी आवाज बुलंद रखेंगे।”
राजनीतिक गलियारों में हलचल
पूर्व मंत्री के इस बयान और प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के बाद प्रदेश की राजनीति में नया उबाल आ गया है। मतदाता सूची से इतने बड़े पैमाने पर नाम हटने के मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।







Leave a Reply