सड़कों की दुर्दशा और आवारा मवेशियों पर हाई कोर्ट गंभीर, मुख्य सचिव से दोबारा मांगी विस्तृत जानकारी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की खस्ताहाल सडकों के मामले में दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मुख्य सचिव से पूछा, सडक सुरक्षा व मवेशियों की समस्या के निदान के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, कोर्ट ने पूरी जानकारी शपथ पत्र के साथ देने का निर्देश दिया है। पीआईएल की सुनवाई के लिए कोर्ट ने 9 सितंबर की तिथि तय कर दी है।सड़कों की खराब स्थिति, रोड सेफ्टी और हाईवे पर आवारा मवेशियों की समस्या को लेकर छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में पहले हुई सुनवाई के दौरान राज्य की एजेंसियों की ओर से किए जा रहे कार्यों की जानकारी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गई थी। कोर्ट कमिश्नर्स की रिपोर्ट और संबंधित विभागों के अनुपालन शपथपत्र पर विचार के बाद हाई कोर्ट ने मामले को आगे की मॉनिटरिंग के लिए 28 जुलाई 2026 को पुनः सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। शपथ पत्र में जानकारी दी गई थी, मवेशियों की परेशानी को कम करने के लिए आवश्यक शेड का निर्माण कराया जा रहा है और इसके जल्द पूरा होने की उम्मीद है।

निर्माण कार्य पूरा होने के बाद राज्य प्रशासन के अधिकारियों से इनके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने का अनुरोध किया गया है। इससे हाईवे और सड़कों पर आवारा मवेशियों की मौजूदगी से होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।शपथ पत्र में इस बात की भी जानकारी दी गई है, संबंधित प्राधिकरण हाई कोर्ट के आदेशों के परिपालनर में समय-समय पर जारी सभी निर्देशों को लागू करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। प्रोजेक्ट कॉरिडोर की नियमित निगरानी की जा रही है तथा सभी संबंधित फील्ड यूनिट्स को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी कमी का तत्काल समाधान किया जा सके, सड़क से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

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