लोक जगत, रायपुर। त्योहारों और शादियों के सीजन में मुंह मीठा करने के लिए खरीदी जाने वाली मिठाइयां आपकी सेहत के लिए धीमा जहर साबित हो सकती हैं। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के कई हिस्सों में मिलावटखोरों का जाल इस कदर फैल चुका है कि अब वे मिठाइयों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए पारंपरिक और सुरक्षित ‘चाँदी के वर्क’ (Silver Leaf) की जगह खतरनाक ‘एल्युमिनियम की परत’ (Aluminium Foil) का खुलेआम इस्तेमाल कर रहे हैं। मुनाफा कमाने की हवस में ये कारोबारी लोगों की जिंदगी के साथ सीधा खिलवाड़ कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?
त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration) और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने जब बाजारों में बिकने वाली मिठाइयों के नमूनों की जांच शुरू की, तो एक चौंकाने वाला सच सामने आया। कई छोटी-बड़ी दुकानों और मिष्ठान भंडारों पर बिकने वाली काजू कतली, बर्फी और अन्य प्रीमियम मिठाइयों पर चढ़ाया गया वर्क असली चांदी का न होकर सस्ती एल्युमिनियम फॉइल का निकला।
जानकारों के मुताबिक, असली चांदी का वर्क बहुत महंगा होता है (लगभग 5000 से 7000 रुपये प्रति किलो या उससे अधिक), जबकि एल्युमिनियम की परत बेहद कम कीमत पर बाजार में उपलब्ध हो जाती है। इसी मुनाफे के चक्कर में कुछ बेईमान कारोबारी ग्राहकों की सेहत दांव पर लगा रहे हैं।
सेहत के लिए कितना खतरनाक है एल्युमिनियम?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि खाने की चीजों के साथ शरीर में एल्युमिनियम का जाना बेहद खतरनाक है। इसके लगातार सेवन से कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं:
0 पाचन तंत्र की खराबी: एल्युमिनियम पेट में जाकर पाचन क्रिया को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है, जिससे गैस, अपच और आंतों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
0 किडनी (गुर्दे) की बीमारी: शरीर में एल्युमिनियम जमा होने से किडनी पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे गुर्दे फेल होने का खतरा बढ़ जाता है।
0 तंत्रिका तंत्र (Neurological Disorders): लंबे समय तक एल्युमिनियम के सेवन से अल्जाइमर (याददाश्त कमजोर होना) और डिमेंशिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारियां हो सकती हैं।
0 हड्डियों का कमजोर होना: यह शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।
कैसे पहचानें असली ‘चाँदी का वर्क’ और नकली ‘एल्युमिनियम’ में फर्क?
आम ग्राहक दुकान पर आसानी से धोखा खा जाते हैं, लेकिन कुछ आसान तरीकों से आप असली और नकली की पहचान कर सकते हैं:
0 अंगूठे का परीक्षण (Thumb Test): मिठाई पर लगे वर्क को अपनी उंगली या अंगूठे से रगड़ें। अगर वह तुरंत गायब हो जाए या मक्खन की तरह त्वचा में मिल जाए, तो वह चांदी है। यदि वह पपड़ी बनकर उतरे या उंगली पर चिपक जाए, तो वह एल्युमिनियम है।
0 जलाकर देखें (Flame Test): वर्क के छोटे टुकड़े को माचिस की तीली से जलाएं। असली चांदी जलने के बाद चमकदार ग्रे या काली राख में बदल जाती है, जबकि एल्युमिनियम पिघलकर काले गोले जैसी गांठ या पन्नी का रूप ले लेता है।
0 वजन और चमक: एल्युमिनियम का वर्क थोड़ा मोटा और अत्यधिक चमकीला (चमकीले पन्नी जैसा) होता है, जबकि असली चांदी का वर्क बेहद बारीक और पारदर्शी होता है।
प्रशासन सख्त, कार्रवाई की चेतावनी…
इस खुलासे के बाद आम नागरिकों में भारी रोष है। उपभोक्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मिलावटखोर कारोबारियों के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाए और उनके लाइसेंस रद्द किए जाएं।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि त्योहारी सीजन को देखते हुए विशेष जांच अभियान तेज कर दिया गया है। शहरभर की मिठाइयों की दुकानों से नमूने (Samples) एकत्र किए जा रहे हैं। यदि किसी दुकान पर एल्युमिनियम का वर्क या अन्य हानिकारक मिलावट पाई जाती है, तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSAI) के तहत भारी जुर्माना और जेल की सजा तक हो सकती है।
सावधानी ही बचाव है: इस त्योहारी सीजन में जब भी आप मिठाई खरीदें, तो अत्यधिक चमकदार या संदेहास्पद दिखने वाली मिठाइयों से बचें। प्रतिष्ठित और भरोसेमंद प्रतिष्ठानों से ही खरीदारी करें और सेहत से जुड़ी किसी भी लापरवाही पर तुरंत प्रशासन को सूचना दें।








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