मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से समस्या का हल नही केवल खानापूर्ति – कांग्रेस

लोक जगत, रायपुर। प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में बैठे लोगों द्वारा मिलने वाली शिकायतों को केवल समस्याओं को संबंधित विभाग में रेफर कर देने को समाधान बता कर खानापूर्ति की जा रही है। सरकार इसी में अपनी पीठ थपथपा रही है। भाजपा सरकार जब से बनी है राजनैतिक प्रचार और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का जतन मात्र करती है उसे जनता की समस्याओं के निराकरण से कोई मतलब नहीं है। मुख्यमंत्री निवास में भी हर गुरुवार को जनता से मिलने का कार्यक्रम शुरू हुआ था, ढाई साल में आधा दर्जन गुरुवार को भी मुख्यमंत्री लोगों से नहीं मिले। भाजपा सरकार ने कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में मंत्रियों को नियमित बैठने की घोषणा किया वह भी बंद हो गया। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन भी बहुत जल्दी उबाऊ कॉल सेंटर में तब्दील होगा फिर बंद हो जायेगा।

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि सरकार की ओर से 16 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित जानकारी के अनुसार, 9 जून से 15 अक्टूबर 2026 के बीच मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर कुल ’2,31,850 शिकायतें’ दर्ज हुईं। इनमें से ’2,05,996 शिकायतों के निराकरण’ की जानकारी दी गई, जबकि ’25,854 शिकायतें लंबित’ थीं। सरकार ने शिकायतों के निराकरण की दर 88.85 प्रतिशत बताई है। ’शिकायत का पोर्टल पर बंद हो जाना और समस्या का जमीन पर हल हो जाना दो अलग-अलग बातें हैं।’ सरकार को विभागवार और जिलावार आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि जनता जान सके कि किस विभाग में कितनी शिकायतें आईं, कितनी लंबित हैं और वास्तविक समाधान की स्थिति क्या है।

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि राज्य में सभी विभागों सरकारी काम कितने दिन में होगा, हर काम को करने के लिए समय अवधि निर्धारित कर सिटीजन चार्टर बनाया गया था और वह आज भी लागू है, लेकिन भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रदेश के दफ्तरो में लगाया गया सिटीजन चार्टर का बोर्ड तक हटा दिया गया। किसी दफ्तर में कोई काम नहीं होता।

प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि प्रदेश में राशन, पेंशन, बिजली, पेयजल, आवास, राजस्व और सरकारी सेवाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए नागरिकों को अनावश्यक परेशान नहीं होना चाहिए। यदि हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी व्यक्ति को कार्यालयों में भटकना पड़ता है, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही की विफलता है।

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