श्रीनगर में लौटी रौनक: धारा-370 हटने के बाद लाल चौक पर निकली माँ दुर्गा की भव्य शोभायात्रा, दिखी अनूठी गंगा-जमुनी तहजीब…

लोक जगत, श्रीनगर। कभी आतंकवाद, असुरक्षा और कश्मीरी पंडितों के पलायन के दौर से गुजरी कश्मीर घाटी की फिजाओं में अब एक नया और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में श्रीनगर में दुर्गोत्सव के समापन पर बंगाली समुदाय द्वारा निकाली गई भव्य शोभायात्रा ने हर किसी का ध्यान खींचा है। ऐतिहासिक लाल चौक और घंटाघर के पास से गुजरी इस शोभायात्रा ने यह साबित कर दिया है कि कश्मीर की पुरानी सांस्कृतिक रंगत और धार्मिक सहिष्णुता अब पूरी तरह वापस लौट रही है।

पारंपरिक उल्लास के साथ माँ दुर्गा को विदाई…
श्रीनगर में दुर्गोत्सव के पावन अवसर पर एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान पुरुषों और महिलाओं ने ढोल की पारंपरिक थाप पर जमकर नृत्य किया और उत्साह के साथ माँ दुर्गा को विदाई दी।
शोभायात्रा आगे बढ़ते हुए ऐतिहासिक अमीरा कदल घाट पहुँची, जहाँ वैदिक मंत्रोच्चार, भव्य आरती और पारंपरिक विदाई गीतों के बीच माँ दुर्गा की प्रतिमा का झेलम नदी में विसर्जन किया गया। इस पूरे आयोजन के दौरान एक बेहद खूबसूरत और मार्मिक पल तब आया, जब स्थानीय मस्जिद से अजान की आवाज़ गूँजते ही शोभायात्रा को कुछ मिनटों के लिए रोक दिया गया। यह दृश्य एक बार फिर कश्मीर की साझी संस्कृति, आपसी भाईचारे और गहरी धार्मिक सहिष्णुता की मिसाल बन गया।

अनुच्छेद 370 हटने के बाद आए व्यापक बदलाव…
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से घाटी के माहौल में अभूतपूर्व सुधार आया है। सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होने के बाद अब रामनवमी, जन्माष्टमी, दुर्गोत्सव और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार सार्वजनिक रूप से और पूरी धूमधाम के साथ मनाए जा रहे हैं।
एक समय था जब डर और आतंक के साये में हिंदू समुदाय के धार्मिक आयोजनों पर रोक-सी लग गई थी, लेकिन आज श्रीनगर के मंदिरों में पूजा-पाठ और उत्सवों की रौनक साफ तौर पर देखी जा सकती है। यह बदलाव घाटी की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।

मंदिरों का जीर्णोद्धार और बढ़ता व्यापार…
घाटी में सिर्फ त्योहारों की वापसी ही नहीं हो रही है, बल्कि आतंकवाद के दौरान क्षतिग्रस्त हुए कई प्राचीन मंदिरों का संरक्षण और जीर्णोद्धार भी तेजी से किया जा रहा है। इससे स्थानीय हिंदू समुदाय को अपनी जड़ों और परंपराओं से फिर से जुड़ने का सुंदर अवसर मिला है।
इस बदलाव का सकारात्मक असर यहाँ के स्थानीय बाजारों और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। दुर्गोत्सव, नवरात्र और दीपावली जैसे अवसरों पर पूजा सामग्री, फूल-मालाओं, सजावटी वस्तुओं और मिठाइयों की माँग में जबरदस्त इजाफा हुआ है, जिससे स्थानीय दुकानदारों को व्यापार के नए और सुनहरे अवसर मिल रहे हैं।
सुरक्षा के बेहतर होते माहौल, आपसी विश्वास और सामाजिक सौहार्द के इस दौर से यह उम्मीद और गहरी हो गई है कि आने वाले समय में कश्मीर घाटी में सभी समुदायों के पर्वों की रौनक और अधिक बढ़ेगी।

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