रायबरेली या वायनाड? कौन सी सीट छोड़ेंगे राहुल गांधी

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देश लोकसभा चुनाव 2024 में रायबरेली और वायनाड से जीत दर्ज करने वाले राहुल गांधी को कोई एक सीट छोड़नी होगी, क्योंकि एक सांसद लोकसभा में दो सीटों का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है। ऐसे में सबकी निगाहें कांग्रेस पर टिकी हैं। अटकलों का दौर शुरू हो गया है कि राहुल गांधी कौन सी सीट छोड़ने वाले हैं। कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में वायनाड और रायबरेली दोनों सीटों पर जीत हासिल करने वाले राहुल गांधी इस बारे में तीन से चार दिनों में फैसला करेंगे। वरिष्ठ पार्टी नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि किसी भी स्थिति में 17 जून से पहले फैसला लिया जाना चाहिए। 18वीं लोकसभा का पहला सत्र 15 जून के आसपास शुरू होने की संभावना है। वेणुगोपाल ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘बेशक, यह निर्णय 17 तारीख से पहले लिया जाना चाहिए… मगर इस पर निर्णय तीन से चार दिनों के भीतर आ जाएगा।’’

 
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केरल की वायनाड सीट बरकरार रखी, जहां से वे लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए। अगर वे इस सीट को बरकरार रखते हैं तो यह उनका दूसरा कार्यकाल होगा। भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के अनुसार, उन्हें 647,445 वोट या कुल डाले गए वोटों का 60% वोट मिला, जबकि उनके दूसरे स्थान पर रहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) की एनी राजा को 283,023 (26% वोट) मिले।
 
दूसरी ओर, चुनाव आयोग के डेटा के मुताबिक,  उत्तर प्रदेश के रायबरेली क्षेत्र में, उन्हें 687,649 (66%) वोट मिले, जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दिनेश प्रताप सिंह 297,619 (29%) वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और 5 बार रायबरेली से सांसद रहीं सोनिया गांधी ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण यह सीट छोड़ दी थी। इस बार भी रायबरेली  में कांग्रेस ने जीत दर्ज की है।
 
भारत में लोकसभा या विधानसभा (राज्य) का चुनाव लड़ने वाला व्यक्ति अधिकतम दो सीटों से चुनाव लड़ सकता है। अगर वे दोनों सीटें जीत जाते हैं, तो उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ती है; खाली की गई सीट को भरने के लिए उपचुनाव कराया जाता है। 2019 के आम चुनावों में राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के अमेठी से चुनाव लड़े, उन्होंने 2004, 2009 और 2014 में इसे जीता था। साल 2019 में वह वायनाड के साथ-साथ अमेठी से भी लड़े थे। मगर पिछली बार स्मृति ईरानी से अमेठी की सीट हार गए लेकिन वायनाड में विजयी हुए।

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