लोक जगत, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों पर लगाई गई रोक और पुलिस की कथित मनमानी के खिलाफ दाखिल नई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि चुनाव आयोग द्वारा फॉर्म-6 के संशोधित प्रारूप को लागू करने का निर्णय शीर्ष अदालत की स्वीकृति के बिना लिया गया था। वकील का कहना था, “अदालत ने 5 अक्टूबर को साफ कर दिया था कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 को कोई मंजूरी नहीं दी है। इसके बावजूद चुनाव आयोग यह दावा कर रहा है कि इसे स्वीकृति मिल चुकी है। यह एक गंभीर विषय है, जिस पर अदालत को दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।”

इस दावे पर जवाब देते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने रुख स्पष्ट किया। चीफ जस्टिस ने कहा कि नए फॉर्म-6 के संबंध में कोई याचिका अदालत के विचारधीन नहीं थी। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा, “हमने केवल परिस्थिति स्पष्ट की थी। इसे मंजूरी मिली थी या नहीं, यह एक भिन्न विषय है। अदालत की टिप्पणियों में से अपनी सुविधानुसार शब्दों को चुनकर उनका अलग अर्थ न निकाला जाए।”







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