CG High Court का आदेश: जेलों में भर्ती में देरी पर नाराजगी, डीजी जेल और DGP से जवाब तलब…

लोक जगत, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश की जेलों में रिक्त पदों पर भर्ती की धीमी प्रक्रिया और बेमेतरा जिले के पथर्रा गांव में स्थापित ओपन जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने डीजी जेल से शपथपत्र के माध्यम से स्पष्ट जवाब मांगा है कि जेलों में लंबे समय से खाली पड़े पदों पर भर्ती कब तक पूरी की जाएगी। इसके साथ ही पथर्रा ओपन जेल की बाहरी सुरक्षा के लिए पुलिस बल उपलब्ध कराने के मुद्दे पर भी कोर्ट ने जवाब तलब किया है। मामले में अगली सुनवाई 26 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

जेलों में रिक्त पदों की भर्ती में देरी पर हाईकोर्ट नाराज मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस केआर महापात्र की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान प्रदेश की जेलों में कर्मचारियों की कमी और भर्ती प्रक्रिया की प्रगति को लेकर सवाल उठाए गए। कोर्ट ने कहा कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चल रही है। इस पर डीजी जेल को शपथपत्र प्रस्तुत कर यह बताने का निर्देश दिया गया कि आवश्यक पदों पर नियुक्तियां कब तक की जाएंगी। हाईकोर्ट ने पथर्रा ओपन जेल के संचालन से संबंधित व्यवस्थाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। पथर्रा में ओपन जेल की स्थापना, सरकार ने दी जानकारी पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष शपथपत्र प्रस्तुत कर बताया था कि अदालत के निर्देशों के अनुरूप बेमेतरा जिले के पथर्रा गांव में ओपन जेल स्थापित करने की कार्रवाई की गई है। सरकार के अनुसार, 14 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना के माध्यम से ओपन जेल की स्थापना की गई। इसके बाद 13 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ ओपन जेल संचालन एवं प्रबंधन नियम, 2026 अधिसूचित किए गए। इन नियमों में पात्र कैदियों के चयन, उनकी पात्रता निर्धारित करने तथा अन्य जेलों से ओपन जेल में स्थानांतरण की प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है। ओपन जेल के संचालन के लिए 48 पदों का प्रस्ताव राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि पथर्रा ओपन जेल के सुचारू संचालन के लिए 48 पदों के सृजन और सीधी भर्ती की अनुमति का प्रस्ताव भेजा गया है। इसके अलावा जेल अधीक्षक सहित अन्य आवश्यक अधिकारियों और कर्मचारियों की पदस्थापना के लिए भी प्रस्ताव तैयार किया गया है।

सरकार ने जानकारी दी कि कैदियों को कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने के लिए संबंधित संस्थानों के साथ समन्वय की पहल भी की जा रही है। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से बताया गया कि पथर्रा ओपन जेल की बाहरी सुरक्षा के लिए आवश्यक सुरक्षा टुकड़ी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। सरकार के मुताबिक, जेल की सुरक्षा के लिए छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की एक कंपनी तैनात करने के संबंध में पुलिस महानिदेशक से कई बार अनुरोध किया जा चुका है। इसके बावजूद सुरक्षा बल की उपलब्धता का मुद्दा बना हुआ है। इस पर हाईकोर्ट ने डीजीपी से भी शपथपत्र के जरिए जवाब मांगा है। कैदियों के कौशल विकास और रोजगार पर भी जोर सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि ओपन जेल के लिए पात्र कैदियों की पहचान और उनके स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। इस जेल का उद्देश्य पात्र बंदियों को सुधारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना है। यहां कैदियों को कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ने के अवसर देने की योजना है। अदालत के पूर्व आदेशों से भी पुष्टि होती है कि पथर्रा में 200 बंदियों की क्षमता वाली ओपन जेल विकसित की गई है।

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