• वर्ष 2023-24 में ₹312.25 करोड़ और 2024-25 में ₹378.52 करोड़ का केंद्रीय हिस्सा रहा अनस्पेंट (Unspent)।
• भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने आरटीआई के तहत जारी किए आधिकारिक आंकड़े।
• जब प्रदेश के स्कूलों में शिक्षक, भवन और सुविधाओं का अभाव है, तब केंद्र से आया बजट क्यों दबाकर रखा गया? — मनोज सिंह ठाकुर
लोक जगत, रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा के बुनियादी ढांचे और संसाधनों की बदहाली के बीच एक अत्यंत गंभीर प्रशासनिक व वित्तीय लापरवाही का मामला सामने आया है। अधिवक्ता, पूर्व सदस्य छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज सिंह ठाकुर द्वारा भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग) से सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त अधिकृत जानकारी में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि समग्र शिक्षा योजना के तहत केंद्र सरकार से स्वीकृत करोड़ों रुपये की राशि राज्य में खर्च ही नहीं हो पा रही है।

आरटीआई से प्राप्त सरकारी आंकड़ों का विवरण:
1. वित्तीय वर्ष 2023-24: केंद्र सरकार द्वारा ₹776.59 करोड़ जारी किए गए, जिसमें से ₹312.25 करोड़ का केंद्रीय हिस्सा बिना खर्च हुए (Unspent) पड़ा रहा।
2. वित्तीय वर्ष 2024-25: केंद्र सरकार ने ₹830.65 करोड़ की राशि जारी की, जिसमें से भी ₹378.52 करोड़ की भारी राशि खर्च नहीं हो सकी और Unspent रही।
3. वित्तीय वर्ष 2025-26 में गंभीर वित्तीय लापरवाही: केंद्र सरकार ने ₹993.40 करोड़ की बड़ी राशि जारी की, लेकिन छत्तीसगढ़ शासन के संबंधित विभाग ने केंद्र सरकार को इसका उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate – UC) तक प्रस्तुत नहीं किया है।
मनोज सिंह ठाकुर ने उठाए तीखे सवाल:
वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने बयान जारी करते हुए कहा कि एक तरफ छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में बच्चे जर्जर भवनों, शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पढ़ने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ केंद्र से स्वीकृत ₹690 करोड़ से अधिक की केंद्रीय राशि का खर्च न होना शिक्षा विभाग की घोर अकर्मण्यता और वित्तीय कुप्रबंधन को दर्शाता है।
उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2025-26 के खर्च का उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) समय पर केंद्र को न भेजा जाना यह संदेह पैदा करता है कि या तो मैदानी स्तर पर काम अटका हुआ है या फिर वित्तीय नियमों की खुली अनदेखी की जा रही है। उपयोगिता प्रमाण पत्र न भेजे जाने की स्थिति में भविष्य में केंद्र से मिलने वाले शिक्षा अनुदान में कटौती का सीधा नुकसान छत्तीसगढ़ के लाखों स्कूली बच्चों को उठाना पड़ेगा।
मनोज सिंह ठाकुर ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो और शासन यह सार्वजनिक करे कि जब स्कूलों को पैसे की सख्त जरूरत थी, तब करोड़ों का फंड अनस्पेंट क्यों रखा गया।
(नोट: प्रेस नोट के साथ भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय के आधिकारिक पत्र क्रमांक F. No. 22-1/2026-SS.4 दिनांक 01.10.2026 की प्रति संलग्न है।)







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