बिक गई बेश कीमती शासकीय सराय की भूमि

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राजस्व अनुविभागीय विभाग की घोर लापरवाही. 
क्षेत्र के नागरिकों का राजस्व न्यालय से टुटा भरोसा. 
निस्तार पत्रक, बंदोबस्त, नक्शा  व वर्तमान भौगोलिक स्थिती मे जमीन आसमान का अंतर. 
पूँजीपतियों, रसूकदारों का है भूमि पर कब्जा. 
तहसीलदार व पटवारी की संदेहस्पद भागीदारी.
         अम्बागढ़ चौकी : नगर पंचायत अम्बागढ़ चौकी में बेश कीमती सरकारी भूमि को षडयंत्र पूर्वक बेचे जाने का मामला सामने आया है। नगर  के मुख्य मार्ग कुमार लाल भीष्मदेव शाह चौक, वार्ड क्रमांक 2,  पर स्थित बेसकिमति शासकीय सराय की भूमि से की छेड़ खानी हुई है । इसे किसी अन्य व्यक्ति ने कूट रचित कर बेच दिया गया है। आखिर यह कार्य किसने और किसके इशारे से किया, यह बहुत ही महत्वपूर्ण  जांच का विषय है । नागरिकों के मन मे राजस्व विभाग के प्रति विश्वाश निरंतर टूटते जा रहा है। विषय वस्तु  खसरा नं. 160/1 रकबा 11 डिसमिल एंव खसरा नं. 162 रकबा 08 डिसमिल पृथक-पृथक से शासकीय सराय की भूमि निस्तार पत्रक पर अंकित है । दिनांक 08-10-1956 । दुर्ग जिला बालोद तहसील पटवारी हल्का नम्बर 106 चौकी अब सोचने वाली बात यह है कि खसरा नं.160/1 तीन भागो में कैसे बट गया । यह कैसे, कब,किसके इशारे से बनी जबकि मूल खसरा 160/1 मात्र 11 डिसमिल हो वह तीन भाग कैसे बनी यह जांच का विषय है । निरंतर संबंधित विषय पर आपत्ति, पेशी चलता रहा है किन्तु राजस्व विभाग द्वारा केवल पेशी पर पेशी, दिनांक पर दिनांक की कारवाही निरंतर प्रचलन पर है । गरीब पीस रहे हैं, पूँजीपति हंस रहे हैं। निरंतर राजस्व न्यालय के दर से न्याय मुँह मोड़ रहा है। आपत्ति व पेशी का परिणाम घोषित करने मे दुविधा कैसी यह समझ से परे है। 
          नगर के नागरिकों का कहना है कि पूर्व मे खसरा क्रमांक 160/1 अम्बागढ़ चौकी, शासकीय सराय की भूमि थी, जल निकास निस्तारण हेतु इस रकबा को चिन्हअंकित किया गया था व राजस्व बंदोबस्त मे स्थान सुनिश्चित किया गया किन्तु कुछ वर्षो मे  शासकीय सराय की भूमि मे पूँजीपतियों का बड़े बड़े घर निर्मित हो जाना कुछ भूमि का नामांतरण व रजिस्ट्री हो जाना, तहसीलदार व पटवारी की भूमिका पर निरंतर सवाल उठा रहे है । संबंधित भूमि ख़रीदी फरोख्त मे रिश्वत खोरी की महक आ रही । 
           शिवसेना नेता दिनेश ताम्रकार का कहना है कि  खसरा क्रमांक 160 / 1 शासकीय सराय की भूमि क्रय विक्रय, रजिस्ट्री, नामांकन व नामांतरण सामान्य निजी व्यक्ति के नाम,  राजस्व के किस धारा व नियम अनुरूप होता है राजस्व अधिकारी द्वारा नगर के नागरिकों को समाचार प्रकाशन के माध्यम से सूचनार्थ करना चाहिए,  जिससे नगर के पूँजीपति ही क्यों गरीब तबके के नागरिक भी इस राजस्व अधिनियम के नियमों का लाभ ले कर किसी शासकीय भूमि को अपने नाम करने मे कुशल हो और अगर शासकीय सराय भूमि का नामांतरण रजिस्ट्री किसी व्यक्ति विशेष नहीं हो सकता तो पूँजीपति द्वारा किया गया अतिक्रमण को हटाना  सुनिश्चित करें । तहसील अन्तर्गत समक्ष विषय पर कारवाही ना होना तहसीलदार व पटवारी की संदिग्ध भूमिका प्रदर्शित करता है । यह राजस्व न्यालय के लिए बहुत ही आलोचना का विषय है। 

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