महंगाई की चौतरफा मार: इस बार 35% तक महंगे हुए असत्य पर सत्य की जीत के प्रतीक रावण के पुतले…

लोक जगत, रायपुर/भिलाई। देशभर में आज विजयादशमी का पर्व बेहद उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। बुराई पर अच्छाई की जीत के इस महापर्व को लेकर लोगों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। हालांकि, इस पावन उत्सव के बीच रावण दहन की तैयारियों पर इस बार महंगाई का भारी साया मंडरा रहा है। महंगाई के कारण पुतलों की चमक फीकी पड़ती नजर आ रही है, और इस बार रावण के पुतले खरीदना समितियों और आयोजकों के बजट पर भारी पड़ रहा है।

लागत बढ़ने के मुख्य कारण…
राजधानी रायपुर से लेकर भिलाई, बेमेतरा और पूरे छत्तीसगढ़ अंचल में इस साल रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले तैयार करने की लागत में 30 से 35 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

कारीगरों और पुतला निर्माताओं का कहना है कि इसके पीछे कई मुख्य वजहें हैं:
0 सामग्रियों के बढ़े दाम: पुतला बनाने में इस्तेमाल होने वाले बांस, रंग-बिरंगे कपड़े, बोरियां, मजबूत रस्सियां और पेंट-कलर के दामों में पिछले साल के मुकाबले काफी इजाफा हुआ है।
0 मजदूरी में बढ़ोतरी: पुतला तैयार करने वाले कुशल कारीगरों की दैनिक मजदूरी बढ़ जाने से कुल लागत सीधी ऊपर चली गई है।
0 परिवहन खर्च: ईंधन के महंगे होने से दूर-दराज तक पुतले पहुंचाने का किराया भी बढ़ गया है।

बाजार में क्या हैं नए रेट्स?
भिलाई के प्रमुख पुतला निर्माण केंद्र (जैसे कुथरेल क्षेत्र) की बात करें तो वहां बाजारों में महंगाई का असर साफ तौर पर देखा जा सकता है।
0 प्रति फीट कीमत: वर्तमान में 15 फीट से लेकर 45 फीट तक ऊंचे रावण के पुतले 1,500 रुपए से लेकर 2,000 रुपए प्रति फीट की दर से बिक रहे हैं।
0 छोटे और मध्यम पुतलों के दाम: पिछले साल जो 20 फीट का रावण का पुतला लगभग 16,000 से 20,000 रुपए में आसानी से तैयार हो जाता था, उसकी कीमत इस बार बढ़कर 27,000 रुपए तक पहुंच गई है।
0 त्रैण दहन का खर्च (बेमेतरा): बेमेतरा जिले से मिल रही रिपोर्ट के अनुसार, रावण के साथ-साथ मेघनाद और कुंभकर्ण—इन तीनों के पुतलों को मिलाकर कुल लागत अब 1 लाख रुपए के आंकड़े को पार कर चुकी है।

आयोजकों की बढ़ी चिंता…
बजट बढ़ने के कारण स्थानीय समितियों और दुर्गा उत्सव समितियों को इस बार रावण दहन के भव्य आयोजन के लिए काफी आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद इसके, पर्व के प्रति लोगों की गहरी आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं आई है, और हर कोई असत्य पर सत्य की इस विजय को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाने की तैयारियों में जुटा हुआ है।

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