संभल जिले में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में अधिकारियों और जिला मजिस्ट्रेट के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग

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उत्तर प्रदेश, के संभल जिले में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में चार व्यक्तियों की मौत के संबंध में पुलिस अधिकारियों और जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है। इसको लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है।

 
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जनहित याचिका हजरत ख्वाजा गरीब नवाज एसोसिएशन के सचिव मोहम्मद यूसुफ ने अधिवक्ता साहेर नकवी और मोहम्मद आरिफ के माध्यम से दायर की है।
 
बता दें, संभल में शाही जामा मस्जिद के न्यायालय द्वारा दिए गए सर्वेक्षण के बाद सांप्रदायिक झड़पें हुईं। 19 नवंबर को संभल की एक सिविल कोर्ट ने एक एडवोकेट कमिश्नर को संभल में शाही जामा मस्जिद का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया था।
 
यह निर्देश अधिवक्ता हरि शंकर जैन और सात अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका के जवाब में जारी किया गया था, जिन्होंने दावा किया था कि मस्जिद का निर्माण मुगल काल के दौरान ध्वस्त किए गए मंदिर के ऊपर किया गया था।
 
आदेश के बाद पथराव और वाहनों में आग लगाने की घटनाओं में चार लोगों की मौत हो गई थी।
 
19 नवंबर को प्रारंभिक सर्वेक्षण के बाद शाही जामा मस्जिद का दूसरा सर्वेक्षण करने के लिए सर्वेक्षणकर्ताओं की एक टीम चंदौसी शहर में पहुंची, जिसके बाद 24 नवंबर को प्रदर्शनकारियों और पुलिस कर्मियों के बीच हिंसा भड़क उठी। हालांकि, पोस्टमार्टम में पुलिस गोलीबारी को मौत का कारण मानने से इंकार किया गया था ।
 
हाई कोर्ट के समक्ष दायर जनहित याचिका में राज्य को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसपी), जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) और उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) सहित अन्य के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
 
याचिकाकर्ता ने उत्तर प्रदेश सरकार को सभी दोषी पक्षों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का सख्त आदेश देने की भी प्रार्थना की है।
 
इस घटना के संबंध में हाई कोर्ट के समक्ष यह दूसरी जनहित याचिका है। इससे पहले हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर हिंसा की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग की गई।
 
19 नवंबर को संभल की एक सिविल कोर्ट ने एक एडवोकेट कमिश्नर को संभल में शाही जामा मस्जिद का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया। मस्जिद के सर्वेक्षण पर रोक लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई।
 
उस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सम्भल की निचली अदालत से कहा था कि वह शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के लिए दिए गए उसके आदेश के तहत कोई कार्रवाई न करे। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति पीवी संजय कुमार की पीठ ने अधिकारियों से अदालत के आदेश के बाद हुई हिंसा के मद्देनजर शांति और सद्भाव बनाए रखने का भी आह्वान किया।

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