दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद भारत सरकार ने एक और रणनीतिक कदम उठाते हुए पूरे विश्व में विशेष डेलीगेशन भेजे थे। इन डेलीगेशन का प्रमुख उद्देश्य था – पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के असली चेहरे को वैश्विक मंचों पर उजागर करना और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंक के खिलाफ एकजुट करने की दिशा में ठोस प्रयास करना था। वहीं अब अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश से लौटे सभी सात सर्वदलीय अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों के सदस्यों से 9 से 10 जून को मुलाकात करेंगे। यह बैठक प्रधानमंत्री निवास या विदेश मंत्रालय में आयोजित की जा सकती है। भारत सरकार ने यह महसूस किया कि केवल सैन्य कार्रवाई से ही नहीं, बल्कि राजनयिक और वैश्विक समर्थन के जरिए भी आतंकवाद के खिलाफ मजबूत संदेश दिया जाना जरूरी है। इसी वजह से केंद्र सरकार ने एक सर्वदलीय पहल के तहत सत्ता और विपक्ष दोनों के नेताओं को शामिल करते हुए डेलीगेशन बनाए और उन्हें विभिन्न देशों में भेजा। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश से लौटे सभी सात सर्वदलीय अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों डेलीगेशन के सदस्यों से 9 से 10 जून को मुलाकात करेंगे। यह बैठक प्रधानमंत्री निवास या विदेश मंत्रालय में आयोजित की जा सकती है। भारत सरकार ने 17 मई को ऐलान किया था कि वह दुनिया को यह स्पष्ट संदेश देना चाहता है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है, और इस लड़ाई में उसे वैश्विक समर्थन की आवश्यकता है। इस मिशन के तहत सात बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल दुनिया के विभिन्न देशों में भेजे गए। इन डेलीगेशन में सांसद, वरिष्ठ राजनीतिक नेता और अनुभवी राजनयिक शामिल थे, जिन्होंने विदेशों में भारत के पक्ष में संवाद और ब्रीफिंग्स कीं। इनका उद्देश्य था-
पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को उजागर करना -भारत की सुरक्षा चिंताओं को साझा करना -आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग की अपील करना कौन-कौन कर रहे थे नेतृत्व? इन प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व देश के प्रमुख दलों के वरिष्ठ नेताओं ने किया.. -शशि थरूर – कांग्रेस -रविशंकर प्रसाद – भाजपा -संजय कुमार झा – जेडीयू -बैजयंत पांडा – भाजपा -कनिमोझी करुणानिधि – डीएमके -सुप्रिया सुले – एनसीपी -श्रीकांत एकनाथ शिंदे – शिवसेना
यह बैठक दिल्ली में 9 या 10 जून को आयोजित की जा सकती है। इसमें सभी प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री को अपने दौरे की रिपोर्ट देंगे। विदेशी नेताओं और संस्थानों से हुई बातचीत का सार साझा करेंगे इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया पर चर्चा करेंगे।
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