स्टेडियम परिसर के दुकानदारों ने किया स्थायी व्यवस्थापन की मांग
दुर्ग। एनजीओ को 5 करोड़ रुपए का कॉर्पोरेट डोनेशन दिलाने का झांसा देकर 20.50 लाख रुपये की ठगी करने वाले आरोपी संतोष तिवारी (37 वर्ष) को दुर्ग पुलिस ने बिहार से गिरफ्तार किया है। आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था, लेकिन पुलिस ने तकनीकी इंटेलिजेंस और ट्रेसिंग के माध्यम से उसे बक्सर जिले के पैतृक गांव से दबोच लिया। जानकारी के अनुसार, पद्मनाभपुर निवासी कृष्णकांत शर्मा ने पुरानी भिलाई थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि इंदौर स्थित एक एनजीओ को डोनेशन दिलाने के नाम पर संतोष तिवारी ने उनसे संपर्क किया। तिवारी ने खुद को कॉर्पोरेट कंपनियों से जुड़ा बताया और दावा किया कि वह 5 करोड़ रुपए का फंड एनजीओ के लिए दिलवा सकता है। इसके एवज में तिवारी ने स्कैनर कोड और यूपीआई ट्रांजेक्शन का माध्यम इस्तेमाल करते हुए 20.50 लाख रुपए ले लिए। पैसे लेने के बाद न तो तिवारी ने एनजीओ को कोई डोनेशन दिलाया और न ही राशि वापस की। जब पीड़ित ने बार-बार संपर्क करने की कोशिश की, तो आरोपी ने मोबाइल बंद कर दिया और फरार हो गया। शिकायत पर थाना पुरानी भिलाई में आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान पुलिस की टीम दिल्ली और बिहार रवाना हुई। निशानदेही के आधार पर आरोपी के दिल्ली पते पर छानबीन की गई, लेकिन वह वहां नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी सुरागों का पीछा किया और अंततः संतोष तिवारी को उसके पैतृक गांव आशा पड़री, थाना सिमरी, जिला बक्सर (बिहार) से गिरफ्तार किया। पूछताछ में तिवारी ने अपना जुर्म कबूल किया। उसे 30 सितंबर 2025 को विधिवत गिरफ्तार कर भिलाई लाया गया। पुलिस की प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी समाजसेवा और एनजीओ को निशाना बना रहा था। कई एनजीओ को बड़ी कंपनियों से डोनेशन दिलाने का झांसा देकर लोगों को भरोसे में लेता था। वह खुद को कॉर्पोरेट कंपनियों से जुड़ा बताता और करोड़ों रुपये का फंड दिलाने का दावा कर मोटी रकम वसूल करता था। स्थानीय पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी से अब अन्य एनजीओ और लोगों को ठगी के शिकार होने से बचाया जा सकेगा। फिलहाल आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा और पुलिस उसके अन्य संपर्कों और पुराने मामलों की जांच में जुटी है।
दुर्ग। दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय की वेबसाइट एक बार फिर साइबर हमले का शिकार हो गई। यह तीन महीने में तीसरी बार है जब विश्वविद्यालय की साइट हैक हुई है। 8 सितंबर को छात्रों ने जब वेबसाइट खोली तो वहां "पाकिस्तान जिंदाबाद" के नारे और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक संदेशों वाले पोस्टर दिखाई दिए।
दुर्ग। पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) दुर्ग रेंज रामगोपाल गर्ग (भा.पु.से.) ने मंगलवार को रेंज स्तरीय दोषमुक्ति प्रकरणों की समीक्षा बैठक आयोजित कर पुलिस और अभियोजन अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। इस बैठक में कुल 259 प्रकरणों की गहन समीक्षा की गई, जो तीन घंटे से अधिक समय तक चली। बैठक का मुख्य उद्देश्य उन खामियों और लापरवाहियों पर चर्चा करना रहा, जिनकी वजह से कई मामलों में आरोपी बरी हो जाते हैं। अग्रिम जमानत निरस्तीकरण के बावजूद गिरफ्तारी नहीं, आईजी ने जताई नाराजगी बैठक में आईजी गर्ग ने विशेष रूप से उन मामलों पर नाराजगी जताई, जिनमें माननीय न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत निरस्त करने के बाद भी पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी सुनिश्चित नहीं कर पाई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि अग्रिम जमानत खारिज कर दी जाती है, तो संबंधित पुलिस अधिकारी की जवाबदेही होगी कि वह जल्द से जल्द आरोपी को गिरफ्तार करे। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि ऐसे प्रकरणों का अलग से ब्योरा तैयार किया जाए और जहां गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, वहां ठोस कारणों का उल्लेख किया जाए। विवेचना और अभियोजन में सुधार की जरूरत आईजी गर्ग ने कहा कि कई मामलों में दोषमुक्ति का कारण पुलिस विवेचना और अभियोजन में लापरवाही होता है। ऐसे मामलों में सुधार लाना बेहद जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन अधिकारियों की वजह से विवेचना या अभियोजन में कमी रही है, उनकी जवाबदेही तय की जाएगी और आवश्यकतानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। झूठी शिकायत करने वालों पर भी होगी कार्रवाई बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि झूठी शिकायत करने वाले व्यक्तियों और निर्दोष लोगों को झूठा फंसाने वाले आरोपियों के खिलाफ अभियोजन अधिकारियों द्वारा न्यायालय में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए। आईजी ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि गलत तरीके से मुकदमे दर्ज कराने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। इससे भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी इस समीक्षा बैठक में दुर्ग रेंज के सभी वरिष्ठ अधिकारी और अभियोजन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित रहे। इसमें संयुक्त संचालक अभियोजन दुर्ग एस.एस. ध्रुव, उप निदेशक अभियोजन दुर्ग श्रीमती अनुरेखा सिंह, सहायक जिला अभियोजन बालोद प्रमोद घृतलहरे, उप निदेशक अभियोजन बेमेतरा आशीष कुमार सिन्हा, सहायक जिला अभियोजन बेमेतरा विनय अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दुर्ग श्रीमती पद्मश्री तंवर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बेमेतरा श्रीमती ज्योति सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बालोद श्रीमती मोनिका ठाकुर, उप पुलिस अधीक्षक श्रीमती शिल्पा साहू, उप निरीक्षक राजकुमार प्रधान एवं पुलिस पीआरओ प्रशांत कुमार शुक्ला शामिल रहे। प्रकरणों की गहन पड़ताल बैठक में 259 प्रकरणों की अलग-अलग समीक्षा की गई। इसमें उन मामलों पर विशेष चर्चा की गई जहां सबूतों की कमी, गवाहों के मुकरने या विवेचना की त्रुटियों के कारण आरोपी दोषमुक्त हो गए। आईजी ने अधिकारियों को आदेशित किया कि भविष्य में विवेचना की गुणवत्ता में सुधार लाया जाए और हर केस में ठोस सबूत व गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। आईजी गर्ग ने साफ कहा कि पुलिस का काम सिर्फ प्रकरण दर्ज करना और कोर्ट में पेश करना भर नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि अपराधी को सजा मिले। इसके लिए विवेचना से लेकर अभियोजन तक हर स्तर पर पारदर्शिता और गंभीरता बरती जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकरण में लापरवाही साबित होती है तो उस अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।
भिलाई। छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर के उम्दा क्षेत्र से 16 वर्षीय नाबालिग लड़की बीते 7 दिनों से लापता है। 27 अगस्त की सुबह वह रोज की तरह घर से काम पर जाने के लिए निकली थी, लेकिन उसके बाद से वापस नहीं लौटी। परिजनों ने उसी दिन थाने का दरवाजा खटखटाया, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया और कहा कि गुमशुदगी 24 घंटे पूरे होने के बाद ही दर्ज होगी। नतीजतन, 28 अगस्त को गुमशुदगी दर्ज हुई। मगर एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी नाबालिग का कोई सुराग नहीं मिला। इस बीच, पीड़ित मां उगाला बंजारे ने सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर प्रशासन और पुलिस से बेटी की तलाश की गुहार लगाई है। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।
मां का दर्द छलका, वीडियो में लगाई गुहार मां उगाला बंजारे ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में रोते हुए कहा- “मेरी 16 साल की बेटी 7 दिन से लापता है। पुलिस मेरी कोई मदद नहीं कर रही। मैं बार-बार थाना आ रही हूं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा। प्लीज सर, मैं हाथ जोड़कर अपील करती हूं, मेरी बेटी को ढूंढ दीजिए। उसके बिना मैं बिल्कुल बेसहारा हूं। मेरी जिंदगी में मेरी लड़की ही सबकुछ है।” उनके इस भावुक अपील वाले वीडियो ने स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा और अब यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
घटना का विवरण पीड़िता की मां ने बताया कि 27 अगस्त की सुबह बेटी रोज की तरह काम पर जाने के लिए घर से निकली थी। दोपहर तक जब वह नहीं लौटी तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। रिश्तेदारों, दोस्तों और आसपास के इलाकों में तलाश की गई, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। अंततः परिवार थाने पहुंचा, मगर पुलिस ने तत्काल रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज करने में 24 घंटे की देरी की, जिससे कीमती समय बर्बाद हो गया।
पुलिस पर लापरवाही का आरोप परिजनों का कहना है कि यदि पुलिस ने पहले दिन ही गंभीरता से कार्रवाई की होती तो बेटी का पता लगाया जा सकता था। उगाला बंजारे का कहना है- “27 अगस्त को सुबह 8 बजे से मेरी बेटी लापता है। मैंने उसी दिन थाने में रिपोर्ट लिखाने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने कहा कि गुमशुदगी 24 घंटे बाद ही दर्ज होगी। 28 अगस्त को मामला दर्ज हुआ। अब 7 दिन हो गए, लेकिन कोई भी अधिकारी हमें जानकारी नहीं दे रहा।” इस आरोप के बाद स्थानीय सामाजिक संगठन और आम लोग भी पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं।
पुलिस की सफाई मामले में भिलाई-3 थाना प्रभारी मनीष शर्मा ने बयान दिया है। उन्होंने कहा- “मामले में पुलिस की ओर से कोई लापरवाही नहीं बरती जा रही है। जांच जारी है। केस में क्या अपडेट है, मैं इसे चेक करवा लेता हूं।” हालांकि परिजनों और स्थानीय लोगों का मानना है कि पुलिस यदि सक्रियता और संवेदनशीलता के साथ कदम उठाती तो अब तक बच्ची का सुराग मिल सकता था। लोगों में गुस्सा और चिंता इस घटना के बाद उम्दा क्षेत्र में लोगों में आक्रोश और चिंता का माहौल है। खासकर अभिभावकों का कहना है कि लगातार नाबालिगों के लापता होने की घटनाएं हो रही हैं, जिससे सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि “एक नाबालिग का 7 दिन तक गायब रहना और उसका कोई पता न लगना गंभीर मामला है। पुलिस को इस पर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए थी। यदि परिवार समय पर वीडियो वायरल नहीं करता तो शायद यह मामला दबा ही रहता।” साइबर और क्राइम ब्रांच की मदद की जरूरत विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल स्थानीय थाने की कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती। बच्ची के मोबाइल कॉल डिटेल्स, सोशल मीडिया गतिविधियों और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच जरूरी है। परिवार की मांग है कि इस केस में पुलिस क्राइम ब्रांच और साइबर सेल की मदद ले। बेटी की तलाश में परेशान मां ने अब सीधे जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही बच्ची का पता नहीं चला तो वह धरना-प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगी।
भिलाई। स्मृतिनगर चौकी क्षेत्र के कोहका इलाके में उस समय सनसनी फैल गई जब स्थानीय लोगों ने थाने के निगरानी बदमाश प्रेमलाल चौहान उर्फ़ प्रेमा का शव मिलने की सूचना पुलिस को दी। सूचना पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची और पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच शुरू कर दी। प्रेमलाल चौहान का शव उसके घर के बाथरूम में पड़ा हुआ मिला। घटनास्थल पर पहुंचकर पुलिस ने इलाके को घेराबंदी कर लिया और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तथा फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने भी मौके पर पहुंचकर साक्ष्यों का निरीक्षण किया। पुलिस ने बताया कि अभी मृत्यु के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही असली कारण स्पष्ट होगा। फिलहाल मर्ग कायम कर मामले को जांच में लिया गया है। पुलिस विभिन्न कोणों से घटना की पड़ताल कर रही है। साथ ही मृतक के आपराधिक रिकॉर्ड और आपसी रंजिश की भी जांच की जा रही है। स्थानीय लोगों के बीच इस घटना को लेकर कई तरह की चर्चाएँ हो रही हैं। प्रेमलाल चौहान का नाम इलाके में निगरानी बदमाशों की सूची में शामिल था और उसके खिलाफ कई आपराधिक प्रकरण दर्ज थे। ऐसे में उसकी अचानक हुई मौत को लेकर पुलिस गंभीरता से जांच कर रही है।
दुर्ग। जिले में अगर आप भी दो पहिया वाहन चला रहे हैं तो यह खबर आपके काम की है. जिलेभर के पेट्रोल पंप पर बुधवार से बिना हेलमेट के पेट्रोल नहीं मिलेगा. ‘नो हेलमेट, नो पेट्रोल’ अभियान जिले में सख्ती के साथ लागू कर दिया गया है. केवल आकस्मिक सेवा, मेडिकल इमरजेंसी और धार्मिक पगड़ी पहनने वाले व्यक्तियों को राहत दी जाएगी.
दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। मामूली विवाद ने इतना बड़ा रूप ले लिया कि तीन मजदूरों ने मिलकर ईंट भट्टा के मुंशी की बेरहमी से हत्या कर दी। मामला चंगोरी गांव के शिवलाल चक्रधारी के ईंट भट्टे का है, जहां 24 अगस्त की रात को शराबखोरी के बीच हुए विवाद ने खूनी अंजाम ले लिया। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान किशन लाल साहू (मुंशी) के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में मामला दुर्घटना बताया गया, लेकिन गहराई से पड़ताल करने पर यह संगठित हत्या का मामला निकला। घटना कैसे हुई? 24 अगस्त की रात करीब 8:30 बजे आरोपी मजदूर—काशीराम चौहान, धनसाय साहू और एक नाबालिग विधिविरुद्ध संघर्षरत बालक अपने क्वार्टर के बाहर बैठकर शराब पी रहे थे। उसी समय मृतक मुंशी किशन लाल साहू वहां आया और पुराने विवाद को लेकर उनसे झगड़ने लगा। वाद-विवाद इतना बढ़ा कि तीनों ने मिलकर उसकी हत्या की योजना बना ली। आरोपियों ने पहले किशन लाल को हाथ-मुक्कों से मारा और पकड़कर दबोचा, फिर काशीराम चौहान ने पास में रखे टंगिया से उसके सिर पर प्राणघातक वार कर दिया। गंभीर चोट लगने से वह वहीं गिर पड़ा और खून से लथपथ हो गया।
हादसा दिखाने की कोशिश हत्या के बाद आरोपी डर गए और उन्होंने इस वारदात को हादसा बताने की योजना बनाई। काशीराम चौहान ने मृतक के मोबाइल से भट्टा मालिक सुभाष चक्रधारी को फोन कर बताया कि शराब पीते समय मजाक-मजाक में किशन लाल गिर पड़ा और टंगिया से सिर में चोट लग गई। इस पर मालिक ने कार से किशन लाल को अस्पताल पहुंचाया, जहां 25 अगस्त की सुबह उसकी मौत हो गई। पुलिस जांच में खुला राज प्रारंभिक रूप से थाना दुर्ग में मर्ग दर्ज हुआ, लेकिन जांच अंजोरा चौकी पुलिस को सौंपी गई। जब मृतक के साथ मौजूद मजदूरों से सख्ती से पूछताछ हुई, तो सच्चाई सामने आई। आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने पुराने विवाद और बार-बार के झगड़ों से परेशान होकर किशन लाल की हत्या की। पुलिस ने उनके मेमोरेंडम बयान दर्ज किए, जिसमें उन्होंने साफ किया कि वे सभी एक ही क्वार्टर में रहते-खाते थे और अक्सर खाने-पीने को लेकर झगड़ा होता था। घटना की रात भी इसी बात पर विवाद हुआ था।
बरामदगी और गिरफ्तारी आरोपियों ने हत्या के बाद घटनास्थल से टंगिया और शराब की बोतल खेत के मेढ़ किनारे फेंक दी थी। काशीराम का खून से सना टी-शर्ट भी क्वार्टर में छुपाया गया था। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर टंगिया, कपड़े और शराब की बोतल बरामद कर लिए हैं। धनसाय साहू के पास से भी खून लगे कपड़े (हाफ पैंट और अंडरवियर) जप्त किए गए हैं। इसके बाद तीनों—काशीराम चौहान, धनसाय साहू और नाबालिग को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
जांच में पुलिस की भूमिका इस पूरे मामले में चौकी प्रभारी अंजोरा संतोष कुमार साहू और उनकी टीम के साथ एसीसीयू की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बारीकी से पूछताछ और घटनास्थल की गहन जांच के बाद ही यह हत्या का राज उजागर हो पाया। इस वारदात से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। मजदूरों के बीच हुई साधारण कहासुनी ने हत्या का रूप ले लिया, जिससे ईंट भट्टा संचालकों और मजदूरों में भय का माहौल है। यह घटना सामाजिक ताने-बाने को भी झकझोरने वाली है, क्योंकि आपसी विवाद और शराबखोरी की वजह से एक निर्दोष की जान चली गई।
दुर्ग। जिले में लगातार हो रही दोपहिया वाहन चोरी की घटनाओं पर नकेल कसते हुए पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। थाना मोहन नगर पुलिस और गठित टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए चोरी की 19 मोटरसाइकिलें बरामद की हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 15 लाख रुपये बताई जा रही है। इस दौरान पुलिस ने दो विधि से संघर्षरत बालकों और एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। वहीं, चोरी के वाहन खरीदने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
कैसे पकड़े गए आरोपी? वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल (भापुसे) के निर्देशन में जिले में "सशक्त एप" के माध्यम से लावारिस और चोरी की गई वाहनों की पहचान और ट्रैकिंग की जा रही थी। इसी क्रम में ग्रीन चौक के पास पुलिस को मुखबिर से तीन संदिग्ध युवकों की मौजूदगी की सूचना मिली। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें पकड़ा और कड़ाई से पूछताछ की। पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे पिछले चार महीने में कुल 19 मोटरसाइकिल और एक्टिवा चोरी कर चुके हैं। चोरी के पीछे का कारण पकड़े गए आरोपी और विधि से संघर्षरत बालकों ने पुलिस को बताया कि वे अपने शौक पूरा करने के लिए मोटरसाइकिलें चुराते थे। चोरी की गई गाड़ियों को वे तुरंत ही अपने परिचितों को कम दामों पर बेच देते थे। खास बात यह रही कि खरीददार जानते हुए भी चोरी की गाड़ियां खरीदते थे, क्योंकि ये बिना नंबर और बिना कागजात की होती थीं। बरामद वाहन पुलिस ने आरोपियों से कुल 19 वाहन बरामद किए, जिनमें – 10 एक्टिवा स्कूटी 09 मोटरसाइकिलें शामिल हैं। बरामद वाहनों की कुल कीमत लगभग 15 लाख रुपये आंकी गई है। खरीददारों पर भी कार्रवाई पुलिस ने खुलासा किया कि चोरी की गाड़ियों को खरीदने में 14 लोग शामिल थे। इन सभी के खिलाफ भी अब कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, खरीददार पूरी तरह जानते थे कि वाहन चोरी का है, बावजूद इसके उन्होंने इसे खरीदा। यह भी अपराध की श्रेणी में आता है। सशक्त एप की भूमिका दुर्ग पुलिस ने हाल ही में "सशक्त एप" की शुरुआत की थी, जिसके तहत चोरी या लावारिस वाहनों का डेटा ऑनलाइन अपडेट किया जाता है। इसी ऐप की मदद से पुलिस को चोरी के वाहनों का लोकेशन और विवरण जुटाने में मदद मिली और बड़ी संख्या में वाहन बरामद हुए। कार्रवाई में शामिल टीम इस पूरी कार्रवाई में गठित टीम के – सउनि. चंद्रशेखर सोनी प्र. आर. मनीष अग्निहोत्री आरक्षक हिमांशु जंघेल आरक्षक खिलेश कुर्रे आरक्षक रवि शंकर मरकाम आरक्षक गजेन्द्र यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस की अपील दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सस्ती कीमत या बिना कागजात वाले वाहन खरीदने से बचें। ऐसे वाहन चोरी के हो सकते हैं और पकड़े जाने पर खरीदार पर भी अपराध का केस दर्ज होगा।
दुर्ग। शासकीय वि.वाय.टी.पी.जी. स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग (छत्तीसगढ़) के प्राणीशास्त्र विभाग के एम.एससी. तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों को जिले के अर्जुंदा स्थित मत्स्य फार्म का भ्रमण कराया गया। इस शैक्षणिक यात्रा का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को मत्स्य पालन की व्यवहारिक जानकारी प्रदान करना था। विद्यार्थियों को मत्स्य प्रजनन, पालन, आहार प्रबंधन, जल गुणवत्ता नियंत्रण तथा मत्स्यों की सामान्य बीमारियों और उनके उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। मत्स्य फार्म के प्रभारी अधिकारी एवं तकनीकी कर्मचारियों ने मत्स्य बीज उत्पादन की विभिन्न प्रक्रियाओं, हैचरी संचालन तथा विभिन्न प्रजातियों के मत्स्यों की पहचान संबंधी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर मार्गदर्शन दिया। इस दौरान विद्यार्थियों ने लाबियो रोहिता, कतला आदि प्रजातियों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और उनके पालन के लिए आवश्यक तकनीकी पहलुओं को समझा। भ्रमण के दौरान जल परीक्षण, आहार मिश्रण की तैयारी तथा मत्स्यों के स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवहारिक विधियाँ भी प्रदर्शित की गईं। प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण से विद्यार्थियों को पुस्तकात्मक ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक अनुभव भी प्राप्त होता है, जो भविष्य में उनके शोध एवं रोजगारोन्मुखी कौशल को विकसित करने में सहायक होगा। यह शैक्षणिक भ्रमण डॉ. अल्का मिश्रा एवं श्री अनुराग मिश्रा के पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ।
भिलाई। डायलिसिस कराकर लौट रही महिला से लूट की वारदात का जीआरपी ने खुलासा किया है। पुलिस ने 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अभी फरार है। वारदात 17 अगस्त की रात करीब 10 बजे की है। दरअसल, भिलाई-3 रेलवे कॉलोनी निवासी कुमुद पटेल (41) अपने भाई आकाश श्रीवास्तव के साथ मित्तल हॉस्पिटल से डायलिसिस कराकर घर लौट रही थीं। घर पहुंचते ही चार युवकों ने उनका काला बैग छीन लिया। बैग में 500 रुपए और डायलिसिस की पर्ची थी। विरोध करने पर आरोपियों ने लोहे की रॉड से महिला के सिर पर वार किया। बचाव में आए भाई आकाश के साथ भी मारपीट की। लोगों के जमा होने पर आरोपी भाग निकले। जल्दबाजी में वे अपनी बाइक मौके पर छोड़ गए। पुलिस ने बाइक के आधार पर भूपेन्द्र कुमार भारद्वाज (35), अखिलेश उर्फ राजा गुप्ता (27) और दुष्यंत दास उर्फ बब्बू (24) को गिरफ्तार किया। चौथा आरोपी देवाशीश अभी फरार है। पूछताछ में पता चला कि आरोपियों ने बैग और रॉड को नाले में फेंक दिया और लूटे गए पैसे खाने-पीने में खर्च कर दिए। 18 अगस्त को तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
भिलाई। छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (SVTU) में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब कैंटीन में अचानक आग लग गई। यह घटना विश्वविद्यालय परिसर के विश्वेश्वरैया भवन, जिसे यूटिलिटी बिल्डिंग भी कहा जाता है, में हुई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कैंटीन में इस्तेमाल हो रहे गैस सिलेंडर से गैस रिसाव (लीकेज) होने के कारण आग भड़की। हालांकि, पुलिस और दमकल विभाग की तत्परता से बड़ा हादसा होने से टल गया।
सिलेंडर लीकेज से उठी लपटें सूत्रों के अनुसार, कैंटीन में खाना बनाने के दौरान गैस सिलेंडर से रिसाव होने लगा। कुछ ही देर में वहां आग की लपटें उठने लगीं और कैंटीन धुएं से भर गया। कैंटीन कर्मचारी और वहां मौजूद लोग जैसे-तैसे बाहर निकले। घटना की सूचना तुरंत विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय पुलिस को दी गई। थोड़ी ही देर में दमकल की गाड़ियां और पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई और आग पर काबू पा लिया गया। समय रहते ब्लॉक खाली कराया गया घटना के समय विश्वेश्वरैया भवन के क्लासरूम में करीब 200 से अधिक इंजीनियरिंग छात्र मौजूद थे। आग की खबर मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत सभी छात्रों और कर्मचारियों को सुरक्षित स्थान पर जाने के निर्देश दिए। ब्लॉक को खाली कराने में शिक्षकों और सुरक्षाकर्मियों ने मदद की। समय पर सतर्कता बरतने से कोई बड़ा हादसा होने से टल गया। महिला कर्मचारी बेहोश, अस्पताल भेजा गया आगजनी के दौरान कैंटीन में काम कर रही एक महिला कर्मचारी बेहोश हो गईं। बताया जा रहा है कि धुएं और घबराहट की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ी। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। डॉक्टरों के अनुसार फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है। दमकल विभाग और पुलिस की कार्रवाई मौके पर पहुंची दमकल विभाग की टीम ने तुरंत आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू किए। कुछ ही देर की मशक्कत के बाद आग नियंत्रित कर ली गई। पुलिस ने भी पूरे भवन को सील कर दिया और वहां मौजूद सिलेंडरों और अन्य सामान को बाहर निकलवाया। अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार यह आग सिलेंडर लीकेज के कारण लगी। हालांकि, विस्तृत जांच की जा रही है। छात्रों में दहशत, प्रशासन ने दिए निर्देश अचानक लगी आग से छात्र काफी सहम गए। कई छात्र कैंपस से बाहर निकल आए और अपने परिवारजनों को फोन कर स्थिति की जानकारी दी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बयान जारी करते हुए कहा कि सभी छात्र और कर्मचारी सुरक्षित हैं। साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, कैंटीन को बंद रखा जाएगा और छात्रों को अन्य स्थानों पर खानपान की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। बड़ी दुर्घटना से बचाव विश्वविद्यालय परिसर में आगजनी की यह घटना बड़ी दुर्घटना में बदल सकती थी, क्योंकि आग लगने के समय भवन में काफी संख्या में छात्र मौजूद थे। अगर समय रहते ब्लॉक खाली न कराया जाता और दमकल विभाग तुरंत मौके पर न पहुंचता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। मौके पर मौजूद छात्रों ने भी बताया कि आग लगने के बाद धुएं के कारण घबराहट बढ़ गई थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और सबको सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
दुर्ग. भिलाई स्थित सेल के सबसे बड़े स्टील प्लांट भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) में शुक्रवार को बड़ा हादसा हो गया. ब्लास्ट फर्नेस-8 में वेस्ट कैचर अचानक फट गया, जिससे तेज धमाके के साथ भीषण आग लग गई. हादसे के बाद प्लांट परिसर में अफरा-तफरी मच गई. तत्काल इसकी सूचना इस्पात प्रबंधन को दी गई और बीएसपी के दमकल दल मौके पर पहुंचे. लगभग दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया.
जानकारी के अनुसार, ब्लास्ट फर्नेस-8 से वर्तमान में प्रतिदिन करीब 9,000 टन इस्पात का उत्पादन किया जाता है. आग लगने से उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है. इस्पात प्रबंधन ने फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के तहत प्रोडक्शन जारी रखने की कोशिश शुरू कर दी है.
हादसे के बाद बीएसपी प्रबंधन ने जांच के आदेश दिए हैं. आग लगने के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है. अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी विशेषज्ञों की टीम पूरे मामले की जांच कर रही है.अच्छी बात ये है कि इस घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है.
दुर्ग। जिला कार्यालय के सभाकक्ष में कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देशानुसार डिप्टी कलेक्टर उत्तम ध्रुव एवं डिप्टी कलेक्टर हितेश पिस्दा ने जनदर्शन कार्यक्रम में पहुंचे जनसामान्य लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी। उन्होंने जनदर्शन में पहुंचे सभी लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और समुचित समाधान एवं निराकरण करने संबंधित विभागों को शीघ्र कार्यवाही कर आवश्यक पहल करने को कहा। जनदर्शन में अवैध कब्जा, आवासीय पट्टा, प्रधानमंत्री आवास, भूमि सीमांकन कराने, आर्थिक सहायता राशि दिलाने सहित विभिन्न मांगों एवं समस्याओं से संबंधित आज 104 आवेदन प्राप्त हुए।
राम पंचायत मुड़पार के किसानों ने धान बिक्री एवं खाद उठाव के लिए सेवा सहकारी समिति को पुनः सेलूद में स्थानांतरित करने की मांग की। किसानों ने बताया कि पूर्व में धान बिक्री एवं खाद उठाव सेवा सहकारी समिति सेलूद में किया जा रहा था, किंतु वर्तमान में यह कार्य अचानकपुर समिति से किया जा रहा है, जो मुड़पार ग्राम से अधिक दूरी पर है, जिससे किसानों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। मुड़पार से सेलूद दो किलोमीटर की दूरी पर है, जबकि अचानकपुर की दूरी अधिक होने के कारण समय व परिवहन खर्च दोनों बढ़ गया है। किसानों ने मांग की है कि सेवा सहकारी समिति सेलूद में ही धान बिक्री एवं खाद वितरण की व्यवस्था पुनः की जाए। इस पर डिप्टी कलेक्टर ने डिप्टी रजिस्टार सहकारी सोसायटी को आवश्यक निराकरण करने को कहा।
नगर पंचायत उतई पार्षद ने किसानों को सिंचाई के लिए नहर से पानी देने आवेदन दिया। किसानों ने बताया कि विगत 15-20 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खेत सूखने लगे हैं और धान की फसलें मुरझाने लगी हैं। खेतों में दरारें पड़ रही हैं, जिससे खाद व दवाई डालना भी संभव नहीं हो पा रहा है। किसानों ने ताण्डुला जलाशय से उतई, करगाडीह, पुरई, पाऊवारा, कोकडी, कोडिया, हनोदा, खम्हरिया, उमरपोटी, बोरीगारका व बोरीडीह गांवों में जल्द से जल्द सिंचाई के लिए नहर का पानी छोड़े जाने की मांग की है। पानी नहीं मिलने से फसले नष्ट हो रहे हैं, जिससे भारी नुकसान हो रहा है। इस पर डिप्टी कलेक्टर ने ईई जल संसाधन विभाग को आवश्यक कार्यवाही करने को कहा। वार्ड 09 के पार्षद ने सार्वजनिक सुलभ शौचालय निर्माण कराने आवेदन दिया। उन्होंने बताया कि ने जिले के छतौना क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक 01 (राजीव नगर) में लगभग 5500 श्रमिक परिवार निवास करते हैं। यह इलाका श्रमिक बाहुल्य है, जहां पहले एकमात्र पुराना सार्वजनिक सुलभ शौचालय था जिसे तोड़ दिया गया है। नया शौचालय का निर्माण करने के लिए पुराना तोड़ा गया था, लेकिन अब तक नया शौचालय नहीं बनाया गया, जिससे वार्ड में गंदगी फैल रही है और खासकर महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि डीएमएफ फंड से जल्द से जल्द नया सुलभ शौचालय स्वीकृत कर निर्माण कराया जाए, ताकि क्षेत्र की गंभीर समस्या का समाधान हो सके। इस पर डिप्टी कलेक्टर ने डीएमएफ प्रभारी को आवश्यक कार्यवाही करने को कहा।
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