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  • इस साल होगा चक्रधर समारोह, आयेंगे बड़े कलाकार, तीन दिवसीय होगा कार्यक्रम, राजा के लिखे ग्रंथ

    05-Aug-2023

    रायगढ़ मुनादी। रायगढ़ के राजा चक्रधर सिंह के संगीत के प्रति अवदानों को याद करने वाला चक्रधर समारोह तीन साल के बाद इस साल फिर से आयोजित किया जाएगा। यह निर्णय गणमान्य लोगों के साथ  जिला प्रशासन की हुए बैठक के बाद लिया गया। हालांकि इस बार यह समारोह तीन दिवसीय ही होगा।  जिला प्रशासन ने इस समारोह के आयोजन को लेकर आज शहर के गणमान्य लोगों की एक बैठक बुलाई थी जिसमें यह निर्णय लिया गया कि इस साल चक्रधर समारोह का आयोजन निगम ऑडोटोरियम में आयोजित की जायेगी और यह तीन दिनों का होगा। इस बात पर लगभग सभी लोग सहमत थे। जिला प्रशासन का कहना था कि चूंकि यह चुनावी वर्ष है और काम का बोझ भी ज्यादा है इसलिए यह सीमित दिनों के लिए ही आयोजित किया जा सकता है। 

    हालांकि राज परिवार के लोग इस बात पर अड़े थे कि यह आयोजन परंपरानुसार 10 दिनों का ही होना चाहिए। उनका यह भी कहना था कि यह पूरे वर्षों की भांति रामलीला मैदान में ही हो। इसपर खेल से संबंधित लोगों ने आपत्ति जताते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। इसके बाद यह निर्णय हुआ कि समारोह का आयोजन नगर निगम ऑडोटेरियम में ही होगा।  इस बार चुनाव के कारण जिला प्रशासन का काम काफी बढ़ गया है। बदली व्यवस्था में अधिकारियों को मतदाता सूची प्रकाशन सहित तमाम जिम्मेदारियां दी जा रही है। अधिकारियों को लगातार ट्रेनिंग के लिए बुलाया जा रहा है। चुनाव संबंधित ड्यूटी में अधिकारियों को सख्त निर्देश हैं कि  कोई कोताही बर्दाश्त नहीं होगी। ऐसे में  अधिकारी ज्यादा समय इस समारोह के लिए नहीं दे पाएंगे। ऐसे में यह आयोजन तीन दिवसीय करने का निर्णय लिया गया है। 
     
    ग्रंथों की बात नहीं हुई
    राजा चक्रधर सिंह को हम उनके संगीत में दिए  गए योगदान के लिए याद करते हैं साथ ही उनके द्वारा लिखित ग्रंथों के लिए भी हम उन्हें जानते हैं। राजा चक्रधर सिंह ने ताल तोय निधि, राग रत्न मंजूषा, नृतस्य सर्वस्वम आदि बड़े ग्रंथों की भी रचना की है। ताल तोय निधि में जहां तबला वादन के सूत्र हैं वहीं नृत्य सर्वस्वम में कथक की बारीकियों को लिखा गया है। इन सभी ग्रंथों के बारे मेंं कहा जाता है कि यह राजमहल में सुरक्षित हैं लेकिन इसे बहुत कम लोगों ने देखा है। समय समय पर लोगों ने यह मांग की है कि इन धरोहरों को सार्वजनिक किया जाय और इन्हें शासकीय पुरातत्व संग्रहालय या ग्रंथालय में रखा जाय। एक बार तत्कालीन कलेक्टर मुकेश बंसल द्वारा भी यह पहल की गई थी लेकिन वे सफल नहीं हुए। इस बार भी लोग इन ग्रंथों को सार्वजनिक करने और सरकार से उन्हें धरोहर घोषित करने की मांग कर रहे हैं, हालांकि यह बात शनिवार को हुई बैठक में नहीं कही गई लेकिन बाहर आकर इस बारे में भी लोगों ने कहां।  अब जबकि चक्रधर समारोह का आयोजन तय हो गया है और इसे तय समय में किया जाना है तब जिला प्रशासन से यह अपेक्षा लाजिमी है कि वह इन ग्रंथों के बारे में भी अपना नजरिया साफ करे। इन ग्रंथों को जो रायगढ़ की थाती है उन्हें संभालने की जिम्मेदारी उठाए और इन्हें सार्वजनिक करवाने में अपनी भूमिका अदा करे।

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