बिलासपुर : मांसिक तौर पर अस्वस्थ 33 साल की युवती 15 साल बाद अब अपने परिवार से मिलेंगी। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन के प्रयास से यह नेक कार्य हो सका। तीन वर्ष पहले कोरबा पुलिस ने युवती को कोर्ट के निर्देश पर सेंदरी स्थित मानसिक चिकित्सालय में भर्ती कराया था। चीफ जस्टिस के निर्देश पर रविवार को स्पेशल ट्रेन से विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी युवती को उनके घर चौबीस परगना पश्चिम बंगाल के लिए लेकर रवाना हुए।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने पश्चिम बंगाल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को इस बात की सूचना दी और खोजबीन करने कहा था। जांच के दौरान एक युवक ने बताया कि उनकी बहन 14 वर्ष पहले गुम हो गई है और उसकी दिमागी हालत भी ठीक नहीं थी। उनके द्वारा फोटो पहचान के लिये भी भेजी गई, जिस पर अस्पताल द्वारा पहचान कर ली गई।
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