राजनांदगांव : राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के महत्तम परिप्रेक्ष्य में देव संस्कृति शिक्षा एवं तकनीकी महाविद्यालय खपरी, दुर्ग द्वारा आयोजित ऑनलाईन विशेष व्याख्यान कार्यक्रम में विशेष आमंत्रित वक्ता के रूप में विचार विज्ञ प्राध्यापक कृष्ण कुमार द्विवेदी ने कहा कि - वर्तमान समय में हिन्दी हमारी पहचान, सम्मान और गौरव की भाषा है। आज देश धरती में सर्वाधिक व्यक्तियों द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं में हिन्दी का स्थान द्वितीय है, विश्व के सौ से अधिक देशों के विश्वविद्यालयों में स्वतंत्र विषय /विभाग के रूप में हिन्दी पढ़ाई जाती है, हिन्दी का अपना वृहद शब्दकोष है तथा स्तरीय साहित्य, लोकप्रिय मानक ग्रन्थों की लम्बी श्रृंखला है। विश्व की बाजारवाद एवं वैश्वीकरण व्यवस्था ने हिन्दी के महत्व को और अधिक बढ़ा दिया है, हिन्दी अब टी.वी. अखबार, ई-मीडिया के विज्ञापन की सर्वप्रमुख भाषा बन गई है। आगे प्राध्यापक द्विवेदी ने विशेष रूप से जन-जन को आह्वान किया कि हिन्दी को औरअधिक समृद्ध, लोकप्रिय बनाने के लिये अपने समस्त कार्य - व्यवहार एवं अभिव्यक्ति की भाषा हिन्दी को ही छपवायें। हमारे गौरवशाली संस्कृति ग्रन्थों की हिन्दी प्रतियाँ गीता, रामायण, वेद, पुराण, उपनिषद आदि घर पर रखें उन्हें पढ़े-पढ़ायें, सभी नामकरण हिन्दी में ही करें। वास्तर में हिन्दी संस्कार, संस्कृति - शिक्षा की भाषा है जिसे अपनाकर प्रत्येक व्यक्ति सत्य सार्थक अर्थो में अपने व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास कर सकता है। आइये हिन्दी दिवस को सार्थक करें हिन्दी में ही लेखन, सम्भाषण, वार्तालाप करने के लिये मनप्राण से संकल्पित हों। इस महत्तम व्याख्यान में डॉ. सुधीर शर्मा कल्याण महाविद्यालय भिलाई, संस्था प्राचार्य डॉ. गुरूपंज,संस्था निदेशक डॉ. ज्योति शर्मा ने भी प्रभावी विचार व्यक्त दिये तथा सभी को हिन्दी को बढ़ाने, प्रचारित करने के लिये अभिप्रेरित किया।
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