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  • लोकसभा स्पीकर के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास नोटिस, राहुल ने नहीं किए हस्ताक्षर...

    10-Feb-2026

     

    नई दिल्ली। भारतीय संसदीय इतिहास में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। विपक्षी दलों ने संयुक्त रूप से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा सचिवालय को सौंपा है। हालांकि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ही इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के तहत लाए गए इस प्रस्ताव ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव को और तेज कर दिया है।
     
    राहुल गांधी और TMC की दूरी बनी चर्चा का विषय...
    इस राजनीतिक घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हस्ताक्षर न होने को लेकर है। जहां कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल स्पीकर पर पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं, वहीं राहुल गांधी के साइन न होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों ने भी नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जिससे विपक्षी एकजुटता की तस्वीर कमजोर नजर आ रही है। हालांकि कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि यह प्रस्ताव संख्या बल के लिए नहीं, बल्कि “लोकतंत्र बचाने का संदेश” देने के लिए है। वहीं कांग्रेस के सूत्रों ने कहा कि स्पीकर को पद से हटाने के नोटिस पर नेता प्रतिपक्ष का हस्ताक्षर करना संसदीय लोकतंत्र में सही नहीं है। इसी वजह से राहुल गांधी ने नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं करने का फैसला किया।
     
    स्पीकर पर लगाए गए चार प्रमुख आरोप...
    अविश्वास नोटिस में लोकसभा स्पीकर के कार्यशैली को लेकर चार गंभीर आरोप लगाए गए हैं—
    बोलने से रोकने का आरोप: 2 फरवरी को राहुल गांधी को सदन में बोलने का अवसर न देना।
    सांसदों का निलंबन: 3 फरवरी को 8 सांसदों के निलंबन को एकतरफा कार्रवाई बताया गया।
    दोहरा मापदंड: सत्ता पक्ष के सांसद द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी पर कार्रवाई न करना।
    महिला सांसदों के प्रति टिप्पणी: विपक्षी महिला सांसदों को लेकर की गई कथित टिप्पणियों पर नाराजगी।
     
    संख्या कम, फिर भी विपक्ष का संदेश...
    विपक्षी सांसदों का कहना है कि वे स्पीकर के व्यक्तिगत सम्मान पर सवाल नहीं उठा रहे, बल्कि चेयर की निष्पक्षता को लेकर चिंता जता रहे हैं। विपक्ष को यह भी पता है कि सदन में प्रस्ताव पारित कराने के लिए उनके पास पर्याप्त संख्या नहीं है, लेकिन वे जनता तक यह संदेश पहुंचाना चाहते हैं कि संसद में उनकी आवाज को दबाया जा रहा है।
     
    उधर, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस की विस्तृत जांच के निर्देश लोकसभा सचिव जनरल को दे दिए हैं और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की बात कही है।

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