डोंगरगढ़ : शहर भारतीय जनता पार्टी के पूर्व महामंत्री विजेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि मोदी सरकार ने छत्तीसगढ़ को 9 हजार करोड़ धान खरीदी के लिए एवं साथ ही घोषणा की है कि इस बार छत्तीसगढ़ से 60 लाख मिट्रिक टन चावल खरिदेंगे,जो कि पिछले साल के मुकाबले डेढ़ गुना ज्यादा है..!
60 लाख मिट्रिक टन चावल के लिए लगभग 90 लाख मिट्रिक टन धान की जरूरत पड़ेगी...केंद्र सरकार की इस घोषणा का सीधा अर्थ है कि इस बार ज्यादा धान की खरीद ज्यादा करनी पड़ेगी...
और यदि "भूपेश सरकार" किसानो के प्रति जरा भी संजीदा है तो उसे भी घोषणा करनी चाहिए कि इस बार किसान से प्रति एकड़ 20 क्विंटल के हिसाब से धान-खरीदी करेंगे...
लेकिन सवाल वही..क्या कांग्रेस में इतनी इच्छाशक्ति है..?
क्योकिं किसान पर राजनीति तो कोई भी मुँह-उठा के कर सकता है, लेकिन किसान "हित के काम" आज मोदी सरकार के अलावा करता हुआ कोई दिखाई नहीं दे रहा..!
किसानों को पिछले खरीदी वर्ष में अपनी फसल सोसायटी से बाहर बेचने पर प्रताड़ित होना पड़ा था, उन्हें अपराधी जैसा व्यवहार भी सहना पड़ा...इसकी पुरावृत्ति इस वर्ष ना हो,क्योकिं किसान अपना उत्पादित धान ही बेचता है,ना की कोई गांजा अफीम...अन्नदाता किसान भगवान स्वरूप है,उसके मान सम्मान का विशेष ध्यान रखा जाए...
लेकिन सवाल फिर वही..सत्ता मद में चूर कांग्रेस को किसान का दर्द दिखाई देगा..??
किसानों को पिछले वर्ष की खरीदी का कुल भुगतान अभी तक नहीं हुआ है, अन्नदाता के उधार के नीचे दबी हुई है भूपेश-सरकार...किसान को उन्हीं के पैसे के लिए तरसा रही है...क्या ये अपराध क्षमा योग्य है..?
क्या छत्तीसगढ़ कांग्रेस और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज किसान से नज़र मिला पाएंगे..?
केंद्र सरकार द्वारा लाये गए नए कृषि सुधार क़ानून में स्पष्ट यह व्यवस्था है कि फसल की पूरी कीमत 72 घंटे में किसानों के खाते में पहुंच जाए,क्या भूपेश बघेल जी इस कानून के अनुसार अपनी कार्यप्रणाली सुधार पाएंगे..??
छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणापत्र में किसानों को दो साल का बोनस देने की घोषणा की थी,फिर आज तक उन्हें मिला क्यों नहीं..?
फिर वही सवाल...70 साल के इतिहास में ये कोई वादा पूरा नहीं कर पाए,तो अब क्या करेंगे..? केवल बेशर्मी की हद तक बयान-वीर ही बने रहेंगे..??
"गिरदावली" के बहाने कांग्रेस सरकार पूरे प्रदेश के किसानों का रकबा घटाने की साजिश में लगी है ताकि धान खरीदी कम करनी पड़े...क्या कांग्रेस सरकार अपनी जेब से किसान को पैसा दे रही है,जो उसे इतनी साजिश किसान के साथ करनी पड़ रही है..?
फिर सवाल वही...किसान के साथ इतना "त्रिया-चरित्र" क्यों किया जा रहा..? यदि थोड़ी भी शर्म जिंदा है तो तत्काल किसान को बोनस का भुगतान किया जाए..!
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