लैलूंगा-बाकरुमा सड़क की असलियत अब गड्ढों से नहीं, गुनाहों से भरी हुई है। महज़ छह महीने पहले अरबों रुपये की लागत से बनी यह सड़क आज इस कदर तबाह हो चुकी है कि हर मोड़ पर मौत और हर गड्ढे में भ्रष्टाचार साफ़ झलकता है। यह महज़ एक निर्माण की विफलता नहीं, बल्कि जनता की आँखों में धूल झोंकने और टैक्स के पैसों को निगल जाने वाली व्यवस्था की नंगी तस्वीर है। गड्ढों में समा गया भरोसा, प्रशासन मूकदर्शक : आज हालात यह हैं कि गड्ढे इतने गहरे और व्यापक हैं कि सड़क ढूंढना मुश्किल हो गया है। बारिश की पहली बूंद ने ही डामर बहा दिया, कीचड़ जमा हो गया, और अब यह सड़क किसी भी पल हादसे की वजह बन सकती है। हैरानी की बात यह है कि आज तक न कोई अफसर मौके पर आया, न मरम्मत हुई और न ही कोई जवाबदेही तय की गई।
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