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Rajnandgaon

  • नगरनार स्टील प्लांट में छत्तीसगढ़ के युवाओं को हक दिलाने शिवसेना का आंदोलन शुरू

    15-Dec-2020

    शिव सेना के आंदोलन को मिल रहा जबरदस्त समर्थन 

                  राजनांदगांव : शिवसेना के प्रदेश महासचिव राकेश श्रीवास्ताव ने कहा कि छत्तीसगढ़ शिवसेना ने केंद्र सरकार द्वारा इस कुत्सित प्रयास को विफल करने के लिए निजीकरण के विरोध में  बस्तरवासियों एवं अपने छत्तीसगढिय़ों नौजवानों  में 60 प्रतिशत बस्तरवासियों के लिए 20 प्रतिशत छत्तीसगढिय़ों के वास्ते और 20प्रतिशत टेकनिशयन अन्य के अनुपात में भागीदारी सुनिश्चित करने आंदोलन शुरू कर दी है  चारामा  कांकेर सहित अन्य जगहों पर जन सभा ली  शिव सेना का नगरनार मोर्चा दुसरा चरण यात्रा  आज 15दिसम्बर को शुरू किया गया     16 दिसंबर को जगदलपुर एक आमसभा में परिवर्तित होकर विरोध दर्ज कराया जायेगा ।
    बस्तर की भौगोलिक और सामाजिक स्थितियों में नगरनार में स्टील प्लांट की आधारशिला सन 2001  में रखी गई। स्पष्ट है कि जब किसी भी जगह प्लांट बनता है तो वहाँ की जमीन ली जाती है लेकिन उसमें स्थानीय लोगों के हितों का ध्यान रखा जाना है , फिर अचानक नीजिकरण विनेशीकरण की बात आ गयी । हृरूष्ठष्ट पिछले पांच दशकों से बस्तर में उत्खनन का कार्य कर रही है, यह बस्तर का इकलौता उधोग है जो , एक उम्मीद थी अगर स्टील प्लांट बनेगा तो बस्तर का विकास होगा और स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा होगी। 2001 से यह प्लांट प्रक्रियाधीन था और आज पूर्णत: की ओर है। 
            इसी बीच केन्द्र सरकार द्वारा एक षडय़ंत्र के तहत नीति आयोग का गठन कर   दिया गया जिसने नगरनार संयत्र को विनेशीकरण की सूची  में डाल दिया और तर्क देते हुए कहा कि हृरूष्ठष्ट एक द्वद्बठ्ठद्बठ्ठद्द कम्पनी है जो स्टील प्लांट को हैंडल नहीं कर सकती इसलिए इसका निजीकरण आवश्यक है और घोषणा के साथ विनवेशीकरण के लिए टेंडर जारी कर दिए गए और इस प्रकार बस्तरवासियों के साथ छलावा किया गया चूंकि यहां पर पांचवी अनुसूची है अनुसूचित जनजाति का इलाका है आदिवासियों की जमीन पर प्रतिबंध है लेकिन छल कर पहले जमीन ली गई और पुनर्वास योजना जैसे पहले खेल खेला गया उसी स्थिति में आज बस्तरवासी - छत्तीसगढिय़ा - नौजवानों के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लग गया ?
               श्रीवास्तव ने कहा कि शिवसेना के आंकड़ों के अनुसार देश में बेरोजगारी कितनी भयंकर है --दो हाथ से काम करने वालों की संख्या 64 करोड़ से ज्यादा है लेकिन इसमें से सम्मानजनक  काम मात्र  5 करोड़ से कम लोगों को ही मिल पाया है जिसमें बैंकों में बीमा कंपनियों में सेना में वायुसेना नौसेना में थलसेना जलसेना - केन्द्र एवं राज्य सरकारों के पब्लिक सेक्टर  में ही अभी तक स्थायी व्यवस्था हो पाई है। 
               बाकी के लोगों की कोई व्यवस्था नहीं है  किसी को साल में 2 महीने और किसी को 3 महीने ही काम मिलता है, सरकार कोई सम्मानजनक काम नहीं दे पाई है।
    किसानों का हाल इतना बुरा है मात्र 40 प्रतिशत खेतों को ही पानी मिल पाता है  60 प्रतिशत  खेती आज भी भगवान या प्रकृत्ति भरोसे ही है इसलिये लोग अपना पेट भरने के लिए बड़े-शहरो में पलायन करते हैऔर शहरो में झुग्गीवासियों की आबादी 65प्रतिशत  बढ़कर हो गई है , आज तक सरकारें सिर्फ  इस कोठी का धान उस कोठी में डालकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रही है।
            शिवसेना के प्रदेश महासचिव राकेश श्रीवास्तव ग्रामीण जिला प्रमुख दिनेश ताम्रकार नारायण झा कबीर धाम जिला प्रमुख प्रकाश वर्मा, शोभाशंकर त्रिपाठी, ,   हेमंत सोनी /भागबली सहित बढ़ी संख्या में शिव सैनिकों ने 
     

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