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Raipur

  • इंदौर के हाल साल से रेनबो टेस्ट तक नहीं

    29-Mar-2025

    टीएमसी। डाक्टर राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय टांडा अस्पताल में थायराइड की मशीन पिछले एक साल से खराब पड़ी हुई है। थायराइड टेस्ट मशीन के खराब होने के कारण मरीजों के थायराइड के टेस्ट नहीं हो पा रहे है। जिसके चलते दूर दराज से आए मरीजों को भारी परेशानियों को झेलने को मजबूर होना पड़ रहा है। टांडा सरकारी अस्पताल में टेस्टों की मुफ्त की सुविधा होने के बाबजूद थायराइड के टेस्ट मुफ्त में भी नहीं हो पा रहे हैं। मरीजों को प्राइवेट लैब्स में नकद पैसे देकर टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। बड़ी विडंबना है लगभग पिछले एक से थायराइड की मशीन को ठीक नहीं करवाया जा सका है और न ही नई मशीन लगाई जा सकी है। थायराइड टेस्ट करवाने के लिए मरीजों को अन्त में थायराइड टेस्टों के लिए मरीजों को प्राइवेट लैब्स का रुख कारण पड़   रहा है। प्राइवेट लैब्स में थायराइड का टैस्ट 400 से 500 रुपए में होता हैं वहीं फेरिटिन का टैस्ट 1400 रुपए में किया जाता है। थायराइड के अंतर्गत भी कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं कई मरीजों के सभी तरह के टेस्ट करने के करीब दो से पांच हजार तक खर्चा आ रहा है। सरकारी अस्पतालों में फ्री की सुविधा होने के बावजूद मरीजों को नकद पैसे खर्च कर टेस्ट करवाने को मजबूर होना पड़ रहा है। हालांकि थायराइड की मशीन की कीमत इतनी अधिक भी नहीं हैं कि इसे खरीदा ना जा सके। एक से दो लाख की लागत वाली थायराइड की मशीन को आसानी से खरीदा भी जा सकता है ताकि दूर दराज के मरीजों को असुविधा न हो। विदित है की प्रदेश के दुसरे बड़े टांडा अस्पताल में छह जिलों चंबा, मंडी, ऊना, हमीरपुर, कुल्लू और 15 लाख की आबादी वाले सबसे बड़े जि़ला कांगडा के करीब प्रतिदिन दो से तीन हजार के करीब मरीज उपचार के लिए यहां पहुंचते हैं। ऐसे में करीब दो हजार से अधिक मरीजों को खून से संबंधित या अन्य टेस्ट करवाने के पड़ते हैं।

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