किसानों का हक व हरित क्रांति के खिलाफ भाजपाई साजिश का खुलासा
राजनांदगांव : छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री शाहिद भाई ने किसान सम्मान राशि के नाम पर छत्तीसगढ़ सरकार पर आरोप लगाने वाले सांसद संतोष पांडे के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि किसानों के हितेषी बनने अफवाह फैलाने के बजाय सांसद केंद्र सरकार से किसानों के आय दोगुनी करने के लिए गठित समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग करें।
महामंत्री शाहिद भाई ने सीधे शब्दों में कहा कि जब से छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी है तब से किसानों के चेहरे में खुशी देखने को मिल रही है छत्तीसगढ़ की सरकार जहां किसानों को कर्जा माफ का तोहफा दिया वही 25 सौ रुपए धान का समर्थन मूल्य देने वाली देश की पहली सरकार बनी वही केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों को 25 सौ रुपए ना मिल पाए इसके लिए सेंट्रल पूल का चावल नहीं खरीदने का दबाव बनाया था लेकिन भूपेश बघेल जी कि मजबूत इच्छाशक्ति के सामने केंद्र सरकार के मंसूबे धराशाई हुए और राज्य के किसानों को धान का समर्थन मूल्य ₹25 प्राप्त हुआ ।महामंत्री शाहिद भाई ने केंद्र सरकार की पोल खोलते हुए कहा कि वर्ष 2015 में केंद्र में बैठी मोदी सरकार किसानों की आय को 2022 तक दोगुना करने का दंभ भरती रही है और इसके लिए 2016 में एक अंतर मंत्रालयींन समिति का गठन कर किसानों की आय दुगना करने के तमाम पहलुओं को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया था वर्ष 2018 में समिति ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी उसके बाद भी आज तक इस और कोई अग्रिम कार्यवाही न किया जाना केंद्र की मोदी सरकार का किसान विरोधी मानसिकता को दर्शाता है वहीं दूसरी ओर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कोई सर्वेक्षण ना करने की बात सदन में कर भाजपा के किसान विरोधी चेहरे को प्रमाणित किया है केंद्र में बैठी मोदी सरकार खेत खलिहान अनाज मंडियों पर अध्यादेश लाकर किसानों के साथ जो क्रूर धोखा की साजिश रची है जिसके अंतर्गत एपीएमसी को खत्म कर कृषि उपज खरीद व्यवस्था को पूरी तरह नष्ट कर पूंजी पतियों की सरकार बनने का काम कर रही है किसानों का जमीन हड़पने की छूट पूंजी पतियों को देने वाली भाजपा सरकार अनाज सब्जी मंडी व्यवस्था जिसके अंतर्गत किसान को उसकी फसल का सही कीमत सही वजन के साथ बिक्री कर प्राप्त होती थी लेकिन अब किसान की फसल को चंद कंपनियां सामूहिक खरीदी की बजाए उसे खेत से खरीदेंगे तो मूल्य निर्धारण वजन कीमत सामूहिक मोलभाव आदि पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी जिसका खामियाजा सिर्फ और सिर्फ किसान को भुगतना पड़ेगा कुल मिलाकर केंद्र सरकार खेत खलियान को किसान के हाथ से छीन कर पूंजीपतियों के हाथ में गिरवी रखने की साजिश रच दी है जो हरित क्रांति को समाप्त करने भाजपाई साजिश का जीता जागता उदाहरण है केंद्र में बैठी मोदी सरकार जो किसानों के साथ निरंतर साजिश एवं छल कर रही है वह किसान सम्मान की बात को क्या जाने और किसान सम्मान राशि के नाम पर मात्र ₹6000 देने में भी असफल है और उस असफलता को छुपाने के लिए भाजपा के सांसद छत्तीसगढ़ सरकार पर आरोप लगा रहे हैं जो इनकी छोटी मानसिकता का परिचायक भी है
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